भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की जुलाई 2026 मासिक बुलेटिन के अनुसार, जून 2026 के दौरान भारतीय पूंजी बाजार ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद उल्लेखनीय मजबूती दिखाई. 

रिपोर्ट के मुताबिक, जून में प्राथमिक बाजार के माध्यम से कुल ₹1,38,548 करोड़ जुटाए गए, जो मई की तुलना में 92 प्रतिशत अधिक है. इस राशि में सबसे बड़ा योगदान डेट बाजार का रहा, जबकि इक्विटी बाजार से भी ₹34,040 करोड़ जुटाए गए. जून में कुल 22 IPO बाजार में आए, जिनमें 3 मेनबोर्ड और 19 SME IPO शामिल रहे.

SEBI के अनुसार, निजी प्लेसमेंट और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) में भी तेज़ी देखने को मिली. केवल QIP और प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के माध्यम से ₹31,196 करोड़ जुटाए गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइनेंस, कृषि एवं खाद्य उत्पाद तथा फार्मास्यूटिकल्स एवं बायोटेक्नोलॉजी ऐसे प्रमुख सेक्टर रहे, जिन्होंने सबसे अधिक पूंजी आकर्षित की.

FPI की बिकवाली जारी, लेकिन घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाजार से ₹49,340 करोड़ की शुद्ध निकासी की. हालांकि, इसी दौरान उन्होंने भारतीय डेट बाजार में रिकॉर्ड ₹55,518 करोड़ का निवेश किया. 

दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹85,936 करोड़ की शुद्ध खरीदारी कर विदेशी बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित किया. यही वजह रही कि जून के दौरान सेंसेक्स 2.3 प्रतिशत और निफ्टी 50 लगभग 1.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए. बैंकिंग, रियल्टी और मीडिया सेक्टर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि आईटी और मेटल शेयरों में कमजोरी रही.

ये भी पढ़ें: विदेशी निवेशक भारत आए बिना कैसे खरीद लेते हैं इन्फ़ोसिस और एचडीएफसी बैंक के शेयर. जानिए ADR, GDR और IDR

डिमैट खातों और म्यूचुअल फंड उद्योग में लगातार विस्तार

SEBI की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. जून के दौरान NSDL में 4.8 लाख और CDSL में 20.9 लाख नए डिमैट खाते खुले. इसके साथ देश में कुल डिमैट खातों की संख्या बढ़कर 25.7 करोड़ हो गई. 

वहीं, म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल Assets Under Management (AUM) बढ़कर ₹82.2 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 10.5 प्रतिशत अधिक है. हालांकि उद्योग में कुल ₹52,949 करोड़ का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, लेकिन इक्विटी योजनाओं में निवेश का प्रवाह मजबूत बना रहा.

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार

रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का भी विश्लेषण किया गया है. मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत का शेयर बाजार मजबूत बना हुआ है. 

जून 2026 के अंत तक भारत का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.05 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया, जिससे भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बन गया. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रुपया भी जून में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.4 प्रतिशत मजबूत हुआ.

क्या संकेत मिलते हैं?

SEBI की जुलाई 2026 रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती अब केवल विदेशी निवेश पर निर्भर नहीं है.

घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, रिकॉर्ड डिमैट खाते, मजबूत म्यूचुअल फंड उद्योग और प्राथमिक बाजार में तेज़ फंड जुटाव यह दर्शाते हैं कि भारत का वित्तीय बाजार वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अपेक्षाकृत अधिक स्थिर और लचीला बन रहा है.

यदि घरेलू निवेश का यह रुझान जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है.

ये भी पढ़ें: विदेशी निवेशकों ने एक दिन में निकाले ₹5,426 करोड़, शेयर बाजार में बढ़ी सतर्कता

"भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की जुलाई 2026 मासिक बुलेटिन के अनुसार, जून 2026 के दौरान भारतीय पूंजी बाजार ने वैश्विक आर्थिक अनिश्…"