पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है. अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व IPS अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने अपना त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष को भेजा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक यह इस्तीफ़ा 1 नवंबर से प्रभावी है. दो दिन के भीतर पार्टी छोड़ने या इस्तीफ़ा देने वाले ये तीसरे AAP विधायक हैं. तीनों विधायकों ने 2 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है.
इस्तीफ़े में क्या कहा?
कुंवर विजय प्रताप ने अपने X पर अमृतसर के लोगों को संबोधित करते हुए एक भावुक संदेश लिखा. उन्होंने जनता के प्यार और सम्मान के लिए आभार जताया और दावा किया कि विधायक के तौर पर उन्होंने अपने 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरे किए हैं. उनके मुताबिक उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि राजनीति में "माई-बाप" संस्कृति को ख़त्म करना रही है.
उन्होंने लिखा कि विधानसभा में उन्होंने पानी और सीवरेज से लेकर सर्किट हाउस, कंपनी बाग़, गंदे नालों, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, सरकारी मेडिकल कॉलेज, सरूप रानी कॉलेज और बरगाड़ी बेअदबी मामले तक के मुद्दे उठाए. उनका कहना है कि गलियों और मोहल्लों के नाम लेकर इलाके के मुद्दे विधानसभा में उठाने की शुरुआत उन्होंने ही की.
भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य साफ़-सुथरी राजनीति और पारदर्शी प्रशासन होगा और उनका एकमात्र उद्देश्य "पंजाब फ़र्स्ट" है.
केजरीवाल और मान पर निशाना
न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफ़े से एक दिन पहले यानी 1 नवंबर को ही कुंवर विजय प्रताप ने AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा था. उनका आरोप था कि पार्टी अपने संस्थापक आदर्शों से भटक गई है. अपने संदेश में भी उन्होंने नशे, वसूली, गैंगस्टरवाद और भ्रष्टाचार से जूझते पंजाब को फिर से प्रगतिशील राज्य बनाने की बात कही.
पहली सूची के बाद शुरू हुई हलचल
इस्तीफ़ों का यह सिलसिला AAP की पहली उम्मीदवार सूची के बाद शुरू हुआ. पार्टी ने 31 अक्टूबर को 2027 चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी जिसमे मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी से, विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को कोटकपूरा से और संजीव अरोड़ा को लुधियाना वेस्ट से उतारा गया.
सूची आने के अगले दिन 1 नवंबर को समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया. दोनों के नाम पहली सूची में नहीं थे. पठानमाजरा ने अपना त्यागपत्र केजरीवाल को भेजा, जबकि जौड़ामाजरा ने फ़ेसबुक पर इस्तीफ़े की घोषणा की.
टिकट का सवाल और नए प्रभारी
समाना और सनौर, दोनों सीटों पर पार्टी ने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं, फिर भी संकेत साफ़ थे. पार्टी ने समाना में पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के पूर्व नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को हलका प्रभारी बनाया है, जबकि सनौर में रणजोध हडाना को यह ज़िम्मेदारी दी गई है. इसी वजह से माना जा रहा था कि मौजूदा विधायकों के टिकट कट सकते हैं.
जौड़ामाजरा कभी भगवंत मान सरकार में मंत्री थे, लेकिन बाद में उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था. पठानमाजरा के रिश्ते भी पार्टी नेतृत्व से तनावपूर्ण रहे. उन्होंने बाढ़ से निपटने समेत कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार के कामकाज पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे. सितंबर 2025 में पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार किया था और हाईकोर्ट ने इस साल मई में उन्हें नियमित ज़मानत दी थी.
कौन हैं कुंवर विजय प्रताप?
कुंवर विजय प्रताप पंजाब पुलिस में आईजी रहे है. 2021 में उन्होंने समय से पहले सेवानिवृत्ति ली और उसी साल आम आदमी पार्टी में शामिल हुए. साल 2022 के चुनाव में उन्होंने अमृतसर नॉर्थ से कांग्रेस के सुनील दत्ती को हराया और 58,133 वोट हासिल किए. वो 2015 के बेअदबी कांड और उसके बाद की पुलिस फ़ायरिंग की जांच से जुड़े रहे थे.
सरकार से पुराने मतभेद
उनका और AAP सरकार का टकराव नया नहीं है. जनवरी 2023 में उन्होंने बेअदबी मामलों की जांच से जुड़े मतभेदों के चलते विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. बाद के वर्षों में भी वो बरगाड़ी मामले समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरते रहे. जून 2025 में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के ख़िलाफ़ विजिलेंस कार्रवाई पर सवाल उठाने के बाद AAP ने उन्हें ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था. इसके बाद अमृतसर नॉर्थ की हलका प्रभारी की ज़िम्मेदारी पूर्व मेयर करमजीत सिंह रिंटू को दी गई.
भाजपा में हुए शामिल
तीनों नेता 2 नवंबर को भाजपा में शामिल हो गए है. चुनाव से कुछ महीने पहले पंजाब में भाजपा के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश है और अब आम आदमी पार्टी के लिए ये चुनौती दोहरी है. उसे अपने नाराज़ विधायकों को संभालना भी है और बाकी उम्मीदवार सूचियों में टिकट बंटवारे को लेकर उठ रहे असंतोष को भी थामना है.
अब देखना यह है कि पार्टी इस बिखराव को कैसे रोकती है और ख़ाली हुई सीटों पर क्या रणनीति अपनाती है.
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"पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है. अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व IPS…"













