उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग ने शनिवार को दो निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ERO) को निलंबित करने का आदेश दिया. आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को दोनों अधिकारियों के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 जोड़ने का भी निर्देश दिया.
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा को लिखे पत्र में चुनाव आयोग ने कहा कि उसने CEO की रिपोर्ट की समीक्षा की है और मयंक गोस्वामी तथा हेमंत चौधरी को निलंबित करने का फैसला लिया है.
यह मामला पिछले महीने सामने आया था, जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे.
बिना दस्तावेजों के मिले फॉर्म 8 के 13,779 आवेदन
22 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अनियमितताओं को स्वीकार किया था और कहा था कि दोनों ERO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. CEO के मुताबिक, एक कंप्यूटर असिस्टेंट ने 31 मई से 29 अगस्त के बीच मतदाताओं की जानकारी में सुधार के लिए फॉर्म 8 के 13,779 आवेदन दर्ज किए थे. हालांकि, कार्यालय में इन आवेदनों से जुड़े कोई भी भौतिक फॉर्म या सहायक दस्तावेज नहीं मिले.
इन 13,779 आवेदनों में से 10,470 को मंजूरी दी गई, जबकि 3,309 आवेदन खारिज कर दिए गए. जांच में मंजूरी दिए गए सभी 10,470 आवेदनों में अनियमितताएं पाई गईं.
चुनाव आयोग ने 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के दोनों ERO मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया. आयोग ने यह भी कहा कि दोनों अधिकारियों के आरोपपत्र आगे की समीक्षा के लिए उसके पास भेजे जाएं. आयोग की पूर्व अनुमति के बिना इन अधिकारियों को दोबारा बहाल नहीं किया जा सकेगा.
FIR में BNS की धारा 198 जोड़ने का निर्देश
आयोग ने आगे निर्देश दिया कि दोनों अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 भी जोड़ी जाए. यह धारा किसी लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना करने से संबंधित है.
चुनाव आयोग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित अदालत में मामलों की पैरवी गंभीरता से की जाए.
इसके अलावा, आयोग ने पीलीभीत की मतदाता सूचियों की जांच को लेकर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है.
आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ERO) को अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की दोबारा गहन जांच करने का निर्देश भी दिया है. इसमें विशेष रूप से फॉर्म 6, 7 और 8 के जरिए नाम जोड़ने, हटाने और उनमें संशोधन से संबंधित डेटा एंट्री की जांच करने को कहा गया है.
वहीं, शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्यभर के ERO कार्यालयों में कंप्यूटर ऑपरेटरों को दिए गए लॉगिन क्रेडेंशियल्स को निष्क्रिय करने का आदेश दिया. यह कदम उनके कथित दुरुपयोग की शिकायतों के बाद उठाया गया है.
क्या है फॉर्म 6, 7 और 8?
फॉर्म 6: मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके जरिए 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र नागरिक वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
फॉर्म 7: मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने या नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होता है.
फॉर्म 8: मतदाता सूची में पहले से दर्ज जानकारी में सुधार, निवास स्थान बदलने या EPIC यानी वोटर ID कार्ड में बदलाव के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
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