दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने बड़ी रैली की जिसमे विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए. सबसे बड़ी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की रही. यह रैली मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में बुलाई गई थी. सभा सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चली. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी के साथ कई विपक्षी नेता इसमें शामिल हुए.
पारित हुआ 'जन महाभियोग' प्रस्ताव
रैली से एक दिन पहले, 31 October को इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जन महाभियोग' का प्रस्ताव पारित किया था. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के आवास पर हुई 'मॉक संसद' में उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया, हालाकी यह प्रस्ताव प्रतीकात्मक है और इसकी कोई संवैधानिक वैधता नहीं है.
प्रस्ताव पर चर्चा के अंत में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए. उनके अनुसार इन मतदाताओं ने 2019 के लोकसभा चुनाव में वोट डाला था. उन्होंने यह भी दावा किया कि 2024 में बीजेपी ने चुनाव तीन प्रतिशत के अंतर से जीता और हर सात में से एक मतदाता का नाम हटाकर आयोग ने 2024 के चुनाव को अवैध साबित कर दिया है.
राहुल गांधी का आरोप: हर व्यक्ति की आवाज़ की चोरी
रामलीला मैदान में राहुल गांधी ने कहा कि देश में कई साल से वोट चोरी हो रही है. उन्होंने पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक के चुनावों के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव का भी नाम लिया. उनका आरोप था कि EVM के साथ गड़बड़ी हुई, मतदाता सूची से नाम काटे गए और कई नाम जोड़े गए. उन्होंने कहा कि यह सामान्य चोरी नहीं है. सामान्य चोरी वह होती है जब कोई दुकान से सामान चुराए, जबकि यह हर व्यक्ति की आवाज़ की चोरी है और इसे देशद्रोह कहा जाना चाहिए.
राहुल गांधी ने कहा कि देश को सही रास्ते पर लाने का पहला कदम ज्ञानेश कुमार को हटाना है. गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान पर कि नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा रहे, उन्होंने पलटवार किया. उनके शब्दों में, उन्हें और प्रधानमंत्री को कहीं जाने नहीं दिया जाएगा, और ज्ञानेश कुमार के बाद उन पर भी कानूनी कार्रवाई होगी.
राहुल ने यह भी दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन पाते. उन्होंने कहा कि संविधान किसी भी व्यक्ति से बड़ा है. शिव की बारात का उदाहरण देते हुए उन्होंने ऐसे भारत की बात कही जिसमें हर किसी के लिए जगह हो. यह रैली वोटर लिस्ट, ईवीएम और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष की लंबी लड़ाई का हिस्सा है.
तेजस्वी, अखिलेश और ममता के तीखे बयान
राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि रामलीला मैदान में आमतौर पर रामायण होती है, लेकिन इस बार 'वोट चोरों' के खिलाफ 'महाभारत' हो रही है. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की तुलना शकुनि के पासों से की और कहा कि जहां खेल बराबरी का न हो, वहां लड़ाई लड़नी पड़ती है. तेजस्वी ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार को जेल भेजा जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई लोकतंत्र को कुचलने की हिम्मत न करे.
समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रामलीला मैदान को 'लोकतंत्र की हल्दीघाटी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले SIR के ज़रिए वोट कटवाए गए. उनके मुताबिक बीजेपी चाहती है कि सिर्फ उसके समर्थक ही देश के नागरिक और मतदाता रहें.
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि चुनाव से पहले राज्य में एक करोड़ से ज़्यादा वोट हटा दिए गए. उन्होंने कहा कि वो चुनाव हारी नहीं, उन्हें हराया गया. ममता ने ऐलान किया कि वो दिल्ली से लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ेंगी. CPIML के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने SIR को आम लोगों के वोट छीनने का ज़रिया कहा. उन्होंने जंतर-मंतर पर लगी पाबंदी का मुद्दा भी उठाया और कहा कि दिल्ली में पुलिस स्टेट जैसे हालात हैं. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती भी मंच पर मौजूद रहे. कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि विरोध सिर्फ एक रैली तक सीमित नहीं रहेगा.
बीजेपी का जवाब और ‘काउंटर रैली’
बीजेपी ने रैली को राजनीतिक प्रचार बताकर खारिज किया. पार्टी ने तंज़ कसा कि विपक्ष राहुल गांधी को अपना 'मॉक प्रधानमंत्री' घोषित कर सकता है. रैली के जवाब में बीजेपी ने भी एक नवंबर को 'काउंटर रैली' का ऐलान किया. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन हरियाणा के रोहतक में इसका नेतृत्व करेंगे.
प्रदर्शन स्थल, सुरक्षा और अपील
अक्टूबर के पहले दो हफ्तों में बड़े प्रदर्शनों के बाद जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना से हटा दिया गया था. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान को प्रदर्शन के लिए तय तीन स्थानों में शामिल किया. रैली के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए. तीन हज़ार से ज़्यादा पुलिसकर्मी और 10 हज़ार अर्धसैनिक बल के जवान तैनात रहे. राहुल गांधी ने छात्रों और नागरिक समाज समूहों से रैली में आने की अपील की थी. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से त्योहारों के मौसम में स्थानीय दुकानदारों से खरीदारी करने को भी कहा. भारतीय युवा कांग्रेस ने कहा था कि रैली में आने वाले लोग सफेद कपड़े पहनेंगे और 'भूतों' जैसे दिखेंगे. इसका मकसद उन मतदाताओं का प्रतीकात्मक विरोध करना है जिन्हें कथित तौर पर मृत घोषित कर दिया गया या जिनके नाम सूची से हटा दिए गए.
ये भी पढ़ें: एक तरफ़ 'दिल्ली चलो', दूसरी तरफ़ BJP पदयात्रा; 1 नवंबर की तारीख पर इतना हंगामा क्यों?
"दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने बड़ी रैली की जिसमे विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयो…"













