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क्या है ये 'न्यूज़ कोठरी' की बला?

'न्यूज़ कोठरी' कोई ज्ञान बांचने वाला लाउडस्पीकर या एसी कमरों में बैठकर 'देश क्या सोच रहा है' तय करने वाला चैनल नहीं है। ये एक बगावत है उस बोरिंग और पकाऊ न्यूज़ के खिलाफ, जो आपको नींद की गोली जैसी लगती है।

सीधी बात, ये आपके मोहल्ले की वो नुक्कड़ वाली चौपाल है, जहाँ बकैती भी होती है और ज्ञान की गंगा भी बहती है। टीवी वाले जो खबरें टाई लगाकर पढ़ते हैं, हम उन्हें सीधा 'कोठरी' की भट्टी में तपाकर, बिना किसी फिल्टर के आपके सामने परोसते हैं। हम वो लिखते हैं जो आप पान की गुमटी पर सोचते हैं और चाय की चुस्कियों के बीच बेधड़क बोलते हैं। खबर भी, नजरिया भी और उसके अंदर का पूरा भौकाल भी।

हमारा भौकाल क्या है?

हम खबरों के पीछे भेड़-बकरियों की तरह नहीं भागते। जो खबर आपके काम की है, उसे पकड़ते हैं और उसका पूरा एक्स-रे कर डालते हैं। हमारी सबसे बड़ी खासियत है हमारा 'स्वैग' और हमारी जुबान। एकदम ठेठ, देसी और बिना किसी लाग-लपेट के। भारी-भरकम शब्दों का रायता फैलाने से हमें परहेज है। हम उसी भाषा में बात करते हैं जिसमें आज का 'यंग इंडिया' बात करता है, जहाँ देसी गालियों सा टशन है और अंग्रेजी की कूलनेस भी।

जैसे ड्रामा सिर्फ़ फिल्मों में नहीं होता, दांवपेंच सिर्फ़ राजनीति में नहीं होते, और खेल सिर्फ़ क्रिकेट नहीं होता। वैसे ही खबरें सिर्फ़ वो नहीं जो दिखती है, वो नहीं जो सिर्फ़ सतह पर है, उन्हें चुनना पड़ता है, छानना पड़ता है। बेमतलब का सेन्सैशनलिज़म या हो किसी नेता का PR. हम इन सबसे दूर ही रहते है, लेकिन जहाँ बात हक की हो, जेंडर, कास्ट, पर्यावरण और सिस्टम की नाकामी की हो, वहाँ हमारी कलम लट्ठ की तरह चलती है–एकदम अग्रेसिव और प्रो-पब्लिक।

कोठरी के पिटारे से और क्या निकलेगा

सिर्फ सूखी ख़बरें पढ़कर तो दिमाग सुन्न हो जाता है न? इसलिए 'न्यूज़ कोठरी' में हम सिर्फ ज्ञान नहीं पेलते, एंटरटेनमेंट का पूरा जुगाड़ भी रखते हैं।

यहाँ आपको मिलेंगे भन्नाट फैक्ट्स, दिमाग के जाले साफ करने वाले रिव्यू, मीम्स, और दुनिया भर का ऐसा रायता जिसे समेटने में आपको मजा आएगा। हम 'लोग क्या कहेंगे' वाले टैबू सब्जेक्ट्स का ऑपरेशन बिना एनेस्थीसिया के करते हैं। इतिहास के वो पन्ने जो दीमक खा रहे थे, उन्हें झाड़-पोंछ कर आपके सामने लाते हैं। हमारी रेंज जाननी है? हम हॉलीवुड के ऑस्कर से लेकर प्रधानी के चुनाव तक, एलन मस्क के मंगल मिशन से लेकर अपने गांव के देसी जुगाड़ तक, और विदेशी वेब सीरीज से लेकर भोजपुरी सिनेमा तक, सबकी खबर रखते हैं।