विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार में एक बार फिर बिकवाली का रुख अपनाया है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के 27 जुलाई 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने कुल ₹13,576.93 करोड़ की खरीदारी की, जबकि ₹19,002.66 करोड़ के शेयर और बॉन्ड बेचे. इसके चलते दिन का कुल शुद्ध निवेश -₹5,425.73 करोड़ रहा.
सबसे अधिक बिकवाली इक्विटी (शेयर बाजार) में देखने को मिली. विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार में ₹11,952.88 करोड़ की खरीदारी की, जबकि ₹15,381.03 करोड़ की बिक्री की. इससे इक्विटी में ₹3,428.15 करोड़ की शुद्ध निकासी दर्ज हुई. अमेरिकी डॉलर में यह निकासी करीब 355.10 मिलियन डॉलर रही.
डेट मार्केट में मिला मिश्रित रुख
इक्विटी में बिकवाली के विपरीत, सामान्य डेट (Debt-General Limit) श्रेणी में विदेशी निवेशकों ने ₹687.13 करोड़ का शुद्ध निवेश किया. हालांकि, Debt-FAR श्रेणी में ₹1,963.14 करोड़ और Debt-VRR में ₹704.15 करोड़ की शुद्ध निकासी दर्ज की गई. हाइब्रिड श्रेणी से भी ₹23.59 करोड़ निकाले गए.
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आसान भाषा में समझें
विदेशी निवेशक दुनिया के बड़े फंड, बैंक और निवेश संस्थान होते हैं, जो भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं. जब वे खरीदारी करते हैं तो बाजार को मज़बूती मिलती है, लेकिन जब वे बिकवाली करते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि एक दिन की बिकवाली का मतलब विदेशी निवेशक भारत छोड़ रहे हैं. कई बार वे मुनाफा वसूली , वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी ब्याज दरों या अपने पोर्टफ़ोलियो में बदलाव के कारण भी बिकवाली करते हैं.
डेरिवेटिव बाजार क्या संकेत दे रहा है?
NSDL के डेरिवेटिव आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने इंडेक्स फ्यूचर्स, स्टॉक फ्यूचर्स और ऑप्शंस में भी बड़े पैमाने पर कारोबार जारी रखा. इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुए हैं, बल्कि वे अपनी रणनीति बदलते हुए हेजिंग और ट्रेडिंग दोनों कर रहे हैं.
आम निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
- एक दिन की बिकवाली से घबराने की जरूरत नहीं है.
- यदि अगले कुछ दिनों तक लगातार बड़ी निकासी होती है, तभी इसे बाजार के लिए बड़ा नकारात्मक संकेत माना जाएगा.
- बाजार की दिशा सिर्फ FPI तय नहीं करते. घरेलू संस्थागत निवेशक (DII), कंपनियों के तिमाही नतीजे, RBI की मौद्रिक नीति और वैश्विक घटनाएं भी बाजार को प्रभावित करती हैं.
- यदि घरेलू निवेशकों की खरीदारी मजबूत रहती है, तो FPI की बिकवाली का असर काफी हद तक संतुलित हो सकता है.
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