केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), ट्रस्ट, सोसायटी और अन्य संस्थाओं के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है. गृह मंत्रालय ने Foreign Contribution (Regulation) Amendment Rules, 2026 अधिसूचित किए हैं.
इन संशोधनों का उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी सुनिश्चित करना है. नए नियमों के तहत अब विदेशी चंदा लेने वाली संस्थाओं को यह स्पष्ट बताना होगा कि वे किस उद्देश्य के लिए धन ले रही हैं, किन राज्यों में उसका उपयोग करेंगी और प्रत्येक परियोजना पर कितना खर्च किया जाएगा.
FCRA क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA), 2010 वह कानून है, जो भारत में विदेश से मिलने वाले दान या आर्थिक सहायता को नियंत्रित करता है. यदि किसी विदेशी सरकार, कंपनी, फाउंडेशन, अंतरराष्ट्रीय संस्था या विदेशी नागरिक से भारत की किसी संस्था को धन मिलता है, तो वह FCRA के दायरे में आता है.
इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का उपयोग केवल सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य, धार्मिक या विकास कार्यों के लिए हो और उसका इस्तेमाल देश की सुरक्षा, संप्रभुता या सार्वजनिक हित के विरुद्ध न किया जाए. वर्तमान में देश में लगभग 14,455 सक्रिय FCRA-पंजीकृत संस्थाएं हैं, जबकि हर वर्ष भारत में लगभग 16,000 करोड़ से 25,000 करोड़ रुपये तक का विदेशी अंशदान विभिन्न संस्थाओं को प्राप्त होता है.
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किन राज्यों और संस्थाओं को मिलता है सबसे ज्यादा विदेशी अंशदान?
गृह मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी अंशदान प्राप्त करने में तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली और केरल लगातार शीर्ष राज्यों में शामिल रहते हैं. इन राज्यों में बड़े अस्पताल, विश्वविद्यालय, धार्मिक संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाले NGO बड़ी संख्या में सक्रिय हैं.
वहीं, World Vision India, Believers Church India, Ramakrishna Mission, Missionaries of Charity, CARE India और SOS Children's Villages India जैसी संस्थाएं विभिन्न वर्षों में सबसे अधिक विदेशी अंशदान प्राप्त करने वालों में शामिल रही हैं. हालांकि, हर वित्तीय वर्ष में यह सूची और प्राप्त राशि बदलती रहती है और इसका आधिकारिक विवरण गृह मंत्रालय के FCRA पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाता है.
कौन विदेशी चंदा ले सकता है और किस पर है रोक?
FCRA के तहत विदेशी अंशदान केवल उन्हीं संस्थाओं को मिल सकता है, जिनके पास वैध FCRA पंजीकरण या गृह मंत्रालय की पूर्व अनुमति (Prior Permission) हो. इसमें NGO, सार्वजनिक ट्रस्ट, सोसायटी, सेक्शन-8 कंपनियां, धार्मिक संस्थान, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक सेवा संगठन शामिल हैं.
दूसरी ओर, सांसद, विधायक, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार, राजनीतिक दल, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, लोक सेवक , न्यायाधीश तथा राजनीतिक प्रकृति के संगठन विदेशी अंशदान स्वीकार नहीं कर सकते. इन प्रतिबंधों का उद्देश्य विदेशी प्रभाव से लोकतांत्रिक और सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखना है.
2026 के संशोधन में क्या बदला?
नए संशोधन के तहत अब विदेशी चंदा प्राप्त करने वाली संस्था को आवेदन के समय यह स्पष्ट बताना होगा कि वह धन का उपयोग धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक या आर्थिक किस उद्देश्य के लिए करेगी. इसके साथ ही यह भी बताना अनिवार्य होगा कि विदेशी धन किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में खर्च किया जाएगा.
सरकार ने इन उद्देश्यों के लिए विस्तृत गतिविधियों की सूची भी जारी की है, जिससे धन के उपयोग की निगरानी आसान हो सके.इसके अलावा, यदि किसी संस्था को विदेशी धन किस्तों में मिलता है तो अगली किस्त जारी होने से पहले उसे पहली किस्त के उपयोग का पूरा लेखा-जोखा, परियोजना-वार खर्च का विवरण और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का प्रमाणपत्र जमा करना होगा. अब वार्षिक रिटर्न में संस्था को परियोजना-वार व्यय, अंतिम विदेशी दानदाता (Ultimate Donor), वेबसाइट और सोशल मीडिया से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी.
आम लोगों और NGOs पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से विदेशी अंशदान लेने वाली संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ेगी और फर्जी या निष्क्रिय संगठनों पर निगरानी मजबूत होगी. सरकार को यह पता लगाने में आसानी होगी कि विदेश से आने वाला धन वास्तव में किस उद्देश्य पर खर्च किया जा रहा है.
वहीं, नियमों का पालन करने वाले NGO को अपने रिकॉर्ड, लेखा-जोखा और दस्तावेज पहले से अधिक व्यवस्थित रखने होंगे. सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य विदेशी चंदे पर रोक लगाना नहीं, बल्कि उसके उपयोग को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि विदेशी सहायता का लाभ वास्तव में जनहित के कार्यों तक पहुंचे.
"केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), ट्रस्ट, सोसायटी और अन्य संस्थाओं के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किय…"
