अगर कोई अमेरिकी निवेशक इन्फ़ोसिस, एचडीएफसी बैंक या आईसीआईसीआई बैंक जैसी भारतीय कंपनियों में निवेश करना चाहता है, तो क्या उसे भारत आकर डीमैट अकाउंट खोलना पड़ेगा? जवाब है- नहीं.

दुनिया के शेयर बाजारों में ऐसी व्यवस्था मौजूद है, जिसके जरिए विदेशी निवेशक अपने ही देश के एक्सचेंज पर बैठकर दूसरे देशों की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं. इस व्यवस्था को डिपॉजिटरी रिसीट (Depository Receipt) कहा जाता है. इसके तीन प्रमुख रूप हैं. एडीआर (ADR), जीडीआर (GDR) और आईडीआर (IDR).

क्या होता है डिपॉजिटरी रिसीट?

डिपॉजिटरी रिसीट यानी DR एक ऐसा वित्तीय प्रमाणपत्र होता है, जो किसी कंपनी के मूल शेयरों का प्रतिनिधित्व करता है. मान लीजिए इन्फ़ोसिस के कुछ शेयर भारत में एक कस्टोडियन बैंक के पास सुरक्षित रखे गए हैं. इसके आधार पर अमेरिका का एक डिपॉजिटरी बैंक एडीआर जारी करता है.

अब अमेरिकी निवेशक इन एडीआर को डॉलर में खरीद और बेच सकते हैं, जबकि असली शेयर भारत में ही सुरक्षित रहते हैं. यानी विदेशी निवेशक सीधे भारतीय शेयर नहीं खरीदते, बल्कि उनके प्रतिनिधि प्रमाणपत्र में निवेश करते हैं.

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एडीआर (ADR) क्या है?

एडीआर (American Depository Receipt) वह डिपॉजिटरी रसीद है, जिसकी ट्रेडिंग केवल अमेरिका के शेयर बाजारों जैसे एनवाईएसई (NYSE) और नैस्डैक (Nasdaq) में होती है. यदि कोई भारतीय कंपनी अमेरिकी निवेशकों से पूंजी जुटाना चाहती है, तो वह एडीआर जारी कर सकती है.

इन्फ़ोसिस, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, विप्रो, डॉ. रेड्डीज़ लेबोरेट्रीज़ और एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ जैसी भारतीय कंपनियों के एडीआर अमेरिका में ट्रेड होते हैं. इससे अमेरिकी निवेशक अपने देश के शेयर बाजार में ही डॉलर के माध्यम से इन कंपनियों में निवेश कर सकते हैं.

जीडीआर (GDR) क्या है?

जीडीआर (Global Depository Receipt) भी एडीआर की तरह ही होता है, लेकिन यह केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहता. इसकी ट्रेडिंग लंदन, लक्ज़मबर्ग, सिंगापुर और अन्य अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में हो सकती है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज़, लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी), भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), गेल (इंडिया), एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियां अलग-अलग समय पर GDR के माध्यम से विदेशी निवेशकों तक पहुंच बना चुकी हैं. GDR के जरिए कंपनियों को कई देशों के निवेशकों से पूंजी जुटाने, विदेशी मुद्रा में फंडिंग प्राप्त करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर मिलता है.

आईडीआर (IDR) क्या है?

आईडीआर (Indian Depository Receipt) विदेशी कंपनियों के लिए बनाया गया है. यदि कोई विदेशी कंपनी भारत के निवेशकों से पैसा जुटाना चाहती है, तो वह भारत में आईडीआर जारी कर सकती है. यानी एडीआर के जरिए भारतीय कंपनियां अमेरिका में निवेश जुटाती हैं, जीडीआर के जरिए वैश्विक बाजारों से पूंजी जुटाती हैं, जबकि आईडीआर के माध्यम से विदेशी कंपनियां भारतीय निवेशकों तक पहुंचती हैं.

निवेशकों के लिए क्यों है फायदेमंद?

अगर ADR और GDR जैसी व्यवस्था नहीं होती, तो विदेशी निवेशकों को भारत में ट्रेडिंग अकाउंट खोलना पड़ता, भारतीय नियमों का पालन करना पड़ता और मुद्रा विनिमय की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता. लेकिन डिपॉजिटरी रिसीट की व्यवस्था निवेश को बेहद आसान बना देती है. 

निवेशक अपने देश के शेयर बाजार में ही भारतीय कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली रसीद खरीदकर निवेश कर सकते हैं.

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