श्रीलंका के साथ होने वाले दो मैचों की टेस्ट श्रंखला कई मायनों में अहम होने वाली है. भारत WTC के रेस में बनी रहे इसके लिए इस सीरीज को जीतना ही होगा. भारत को अगर WTC फाइनल खेलना है तो उसे 9 में से 7 मैच जीतने होंगे. भारत के लिए इससे भी बड़ा चैलेंज होगा स्पिन के खिलाफ बल्लेबाजी को सुदृढ़ करना.
रेड बॉल खेलने वालों की कमी
भारतीय टीम में इस समय ज्यादातर खिलाड़ी मुख्यतः सफेद गेंद वाली क्रिकेट खेलते हैं. पिछले कुछ समय से भारतीय टीम में टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों की कमी रही है. जो भी नए खिलाड़ी टीम में आते हैं वह आईपीएल के पर्फॉर्मेंस के आधार पर आ रहे हैं. नए खिलाड़ियों में टी-20 का अनुभव तो बहुत है पर वही आदत टेस्ट क्रिकेट में उनकी कमजोरी भी साबित होती है. टेस्ट क्रिकेट में टेंपरामेंट की आवश्यकता होती जबकि इन खिलाड़ियों में छक्के-चौके मारने की आदत सी है और सब्र की कमी दिखती है.
स्पिन के खिलाफ भारत का खराब प्रदर्शन
पिछले दो सालों में भारतीय टीम ने घर पर दो सीरीज गंवाई है. जिसमें सबसे बड़ा कारण है भारतीय बल्लेबाजों का स्पिन के खिलाफ खराब प्रदर्शन. स्पिन के खिलाफ जो टीम कभी सबसे सक्षम नजर आती थी पिछले कुछ समय में वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन के उभरी है. 2024 में न्यूजीलैंड से हुई तीन मैचों की सीरीज में भारत ने स्पिनर्स के सामने 36 विकेट गंवाए थे. भारत के सीरीज हार में यह सबसे बड़ा कारण था. भारत यह सीरीज 3-0 से हार गया था.
उसके बाद हुई दो मैचों की अफ्रीका से सीरीज में भी भारत का कुछ यही हाल था. भारत के 25 विकेट स्पिनरों के सामने गिरे थे और भारत यह सीरीज 2-0 से हार गया था.
श्रीलंका में कैसे होंगे हालात
दो मैचों की श्रंखला में भारत की सबसे बड़ी चुनौती स्पिन ही होगी. सीरीज के दोनों मैच गॉल और कोलंबो में खेले जाएंगे. दौरे का पहला मैच गॉल में और दूसरा मैच कोलंबो में खेला जाएगा. इन दोनों ही मैदानों पर स्पिनर्स को काफी मदद मिलती है. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में इन दोनों मैदानों पर गिरे 2875 विकेटों में से 1744 विकेट स्पिनरों के खाते में गए हैं. अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाजों की तैयारी कितनी पुख्ता है.
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