केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. नए नियम के तहत विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में निर्मित या उत्पादित वस्तुओं का भंडार अपने पास रख सकती हैं, लेकिन इस भंडार का उपयोग केवल निर्यात के लिए किया जा सकेगा. भारत में खुदरा बिक्री के लिए इस तरह वस्तुओं का भंडार रखने की अनुमति नहीं होगी.
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि सरकार को यह बदलाव करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों को बड़ी विदेशी कंपनियों से बचाना है या भारत को विनिर्माण और निर्यात का बड़ा केंद्र बनाना?
पहले समझिए ई-कॉमर्स का मौजूदा ढांचा
भारत में विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां मुख्य रूप से बाजार-मंच व्यवस्था के तहत काम करती हैं. इसमें Amazon या Flipkart जैसे मंच खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ते हैं. सामान बेचने वाला अलग विक्रेता होता है, जबकि कंपनी उसे अपना ऑनलाइन मंच उपलब्ध कराती है. इसके विपरीत भंडार-आधारित व्यवस्था में कंपनी स्वयं सामान खरीदती है, उसका भंडार अपने पास रखती है और फिर ग्राहक को बेचती है.
भारत में विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए इस तरह की घरेलू खुदरा बिक्री पर पहले से ही सीमाएं हैं. नए बदलाव से यह और स्पष्ट किया गया है कि भारत में निर्मित वस्तुओं का भंडार रखने की अनुमति निर्यात के उद्देश्य से दी जा सकती है.
ये भी पढ़ें: भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़कर A- जापानी एजेंसी JCR ने किया बड़ा अपग्रेड
छोटे दुकानदारों की चिंता भी बड़ी वजह
सरकार लंबे समय से इस बात को लेकर सतर्क रही है कि बड़ी विदेशी कंपनियां अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल करके घरेलू खुदरा बाजार में अत्यधिक प्रभाव न बना लें.
यदि कोई बड़ी कंपनी बड़ी मात्रा में सामान खरीदकर अपने पास रखती है और फिर कीमतों या छूट पर अधिक नियंत्रण हासिल करती है, तो छोटे दुकानदारों और स्वतंत्र विक्रेताओं के लिए उसके साथ प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो सकता है.
इसी कारण सरकार विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के मंच-आधारित कारोबार और स्वयं सामान रखकर बेचने वाले कारोबार के बीच अंतर बनाए रखना चाहती है.
क्या Amazon और Flipkart पर सामान बिकना बंद हो जाएगा?
नहीं. नए नियम का यह अर्थ नहीं है कि Amazon और Flipkart भारत में सामान बेचना बंद कर देंगे. इन मंचों पर बड़ी संख्या में स्वतंत्र विक्रेता अपने उत्पाद बेचते हैं. यह कारोबार बाजार-मंच व्यवस्था के तहत जारी रह सकता है.
असल सवाल यह है कि किसी उत्पाद का भंडार किसके पास है, सामान किस संस्था के स्वामित्व में है और भारत में उसकी बिक्री किस व्यवस्था के तहत हो रही है.
Amazon Basics और Flipkart SmartBuy पर क्या असर?
Amazon Basics और Flipkart SmartBuy जैसे अपने नाम से बेचे जाने वाले उत्पादों को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है. लेकिन केवल किसी उत्पाद पर Amazon या Flipkart का नाम देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि विदेशी कंपनी स्वयं उसका भंडार रखकर भारत में सीधे खुदरा बिक्री कर रही है.
यह जानना जरूरी होगा कि इन उत्पादों की आपूर्ति, स्वामित्व, भंडारण और बिक्री किस संस्था और किस कानूनी व्यवस्था के माध्यम से हो रही है. इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नए नियम के कारण Amazon Basics या Flipkart SmartBuy जैसे उत्पाद भारत में बिकना बंद हो जाएंगे.
भारत में बनाओ और दुनिया में बेचो
सरकार के इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पक्ष निर्यात भी है. नए नियमों के तहत भारत में निर्मित वस्तुओं का भंडार निर्यात के लिए रखा जा सकता है. इससे विदेशी कंपनियों के माध्यम से भारतीय निर्माताओं को विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है.
सरकार का संदेश मोटे तौर पर यही है- भारत में उत्पादन बढ़ाइए, यहां सामान रखिए और विदेशों में बेचिए; लेकिन घरेलू खुदरा बाजार में विदेशी निवेश के नियमों का पालन कीजिए.
"केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. नए नियम के तहत विदेशी निवेश वाली …"
