पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने शुक्रवार को दुनिया भर के बाज़ारों की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध, इज़रायल-लेबनान मोर्चे पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां और लाल सागर- होर्मुज़ क्षेत्र में बढ़ता जोखिम अब सीधे कच्चे तेल, शेयर बाजार और कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहा है. भारत में भी इसका असर शेयर बाज़ार पर दिखाई दिया, जहां सेंसेक्स दबाव में कारोबार करता नजर आया.
ईरान युद्ध अभी खत्म नहीं, तेल 108 डॉलर के पार
अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी 2026 में शुरू हुआ ईरान युद्ध अब तक किसी निर्णायक समाधान तक नहीं पहुंचा है. AP की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के नियंत्रण को कमजोर करने और उसके तेल निर्यात पर दबाव बनाने में प्रगति की है, लेकिन संघर्ष अभी जारी है. इसी बीच ईरान समर्थित हूती गतिविधियों ने लाल सागर क्षेत्र में भी जोखिम बढ़ाया है.
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर पड़ा है. शुक्रवार को Brent crude की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई. होर्मुज और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने से वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता गहरा गई है. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है. इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है.
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इज़रायल-लेबनान मोर्चे पर भी तनाव
ईरान के साथ युद्ध के समानांतर इज़रायल और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच भी तनाव बना हुआ है. 10 सितंबर को इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के Ali al-Taher Ridge के नीचे मौजूद हिजबुल्लाह के एक बड़े सुरंग नेटवर्क को नष्ट करने का दावा किया.
इज़रायल के मुताबिक, यह नेटवर्क करीब 2 किलोमीटर लंबा था और इसमें रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन, एंटी-टैंक हथियार और विस्फोटक मौजूद थे. यह घटनाक्रम बताता है कि जून में हुए अमेरिकी मध्यस्थता वाले युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
शेयर बाज़ार पर भी सीधा असर
मध्य-पूर्व के बढ़ते तनाव और महंगे तेल ने भारतीय शेयर बाज़ार पर दबाव बढ़ाया. शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंचे, जबकि 16 में से 15 प्रमुख सेक्टरों में गिरावट देखी गई. महंगे तेल के कारण महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है.
सोना-चाँदी के भाव पर क्या असर?
आमतौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तरफ रुख करते हैं. लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है. अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोना दबाव में है.
Reuters के मुताबिक, 11 सितंबर को स्पॉट गोल्ड करीब 4,351.97 डॉलर प्रति औंस पर था और सप्ताह के दौरान करीब 2% नीचे था. चांदी करीब 63.93 डॉलर प्रति औंस पर थी.
IBJA के नवीनतम उपलब्ध भाव
IBJA के 11 सितंबर 2026 के रेट के अनुसार:
- 999 गोल्ड: ₹1,54,028 प्रति 10 ग्राम
- 995 गोल्ड: ₹1,53,411 प्रति 10 ग्राम
- 916 गोल्ड: ₹1,41,090 प्रति 10 ग्राम
- 750 गोल्ड: ₹1,15,521 प्रति 10 ग्राम
- 585 गोल्ड: ₹90,106 प्रति 10 ग्राम
- 999 सिल्वर: ₹2,38,556 प्रति किलोग्राम
11 सितंबर के रेट में 999 गोल्ड ₹1,54,028 प्रति 10 ग्राम और 999 सिल्वर ₹2,33,642 प्रति किलोग्राम रही. IBJA के ये रेट GST और मेकिंग चार्ज के बिना हैं.
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में ईरान युद्ध, होर्मुज़ स्ट्रेट की स्थिति, इज़रायल-हिजबुल्लाह संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतें बाज़ार की दिशा तय करने वाले बड़े फैक्टर रहेंगे.
अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है और तेल 100 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो भारत में महंगाई और शेयर बाजार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है. दूसरी ओर, युद्ध में किसी तरह की कूटनीतिक प्रगति होने पर तेल की कीमतों में राहत और जोखिम वाली संपत्तियों में दोबारा खरीदारी देखने को मिल सकती है.
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