भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली. वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 555.23 अंक यानी 0.73% गिरकर 75,577.58 पर बंद हुआ, जबकि निफ़्टी 144.05 अंक यानी 0.61% फिसलकर 23,635.10 पर आ गया.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत ने बढ़ाई चिंता

बाजार में सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों से आया. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश के व्यापार घाटे, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है. 

इसका असर बैंकिंग, आईटी और कई बड़े शेयरों पर देखने को मिला. हालांकि, डिफेंस शेयरों में मज़बूती रही और मिडकैप- स्मॉलकैप सूचकांकों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया.

निफ़्टी के लिए 23,600 अहम स्तर

बाजार विशेषज्ञों की नजर अब 23,600-23,500 के आसपास के स्तर पर है. इससे नीचे कमजोरी बढ़ने की आशंका है. वहीं तेज़ी लौटने के लिए निफ़्टी का 23,800 के ऊपर टिकना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पिछले सात कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ़्टी दोनों में करीब 2.2% की गिरावट आ चुकी है. ऐसे में निवेशकों के लिए आने वाले कारोबारी सत्र काफी अहम रहेंगे. 

सोना-चाँदी के भाव भी बढ़े

शेयर बाजार में बिकवाली के बीच सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी में तेजी देखने को मिली. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आज के आंकड़ों के मुताबिक, आज सुबह का भाव इस प्रकार रहा: 

सोमवार के मुकाबले 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,475 से बढ़कर ₹1,53,309 हुआ, यानी करीब ₹834 प्रति 10 ग्राम की तेज़ी. वहीं चाँदी ₹2,31,489 से बढ़कर ₹2,34,056 प्रति किलो हो गई.

IBJA की दरें बिना 3% GST और मेकिंग चार्ज के होती हैं, इसलिए ज्वैलरी खरीदते समय ग्राहक को वास्तविक कीमत इससे अधिक चुकानी पड़ सकती है. 

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

फिलहाल बाजार में महंगा क्रूड, पश्चिम एशिया का तनाव और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता प्रमुख जोखिम बने हुए हैं. ऐसे माहौल में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जबकि सोने और चाँदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रह सकती है. इसलिए छोटे निवेशकों को बाजार में जल्दबाज़ी के बजाय कंपनियों के फ़ंडामेंटल और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए.

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