इलाहाबाद, अगस्त 14: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली. आय से अधिक संपत्ति (disproportionate assets) से जुड़े आरोपों के एक मामले में शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को फिलहाल आगे कार्यवाही न बढ़ाने का निर्देश दिया है.
साथ ही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी हाईकोर्ट के पहले के आदेशों के तहत कोई रिपोर्ट दाखिल न करने को कहा गया.
किस बेंच ने सुनी याचिका
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह सुनवाई की. बेंच ने कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर, जिन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था, साथ ही सीबीआई और ED को भी नोटिस जारी किया.
सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई टालने को कहा
शीर्ष अदालत राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई तक अपनी कार्यवाही टाल दे. यह मामला हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष लंबित है.
कपिल सिब्बल ने मामले को बताया 'विच-हंट'
इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कार्यवाही का कड़ा विरोध करते हुए मामले के आधार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह कानून के लिए पूरी तरह अनजान प्रक्रिया है और इसे "विच-हंट" करार दिया, जिसे कानून में मान्यता नहीं है.
सिब्बल ने याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर की योग्यता (locus) पर भी सवाल उठाया और कहा कि उन्होंने अपनी साख उजागर नहीं की. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सीबीआई ने अब तक सिर्फ शिकायत का सत्यापन किया है और पूछा कि अगर आरोप गंभीर थे तो जांच एजेंसियों ने स्वतंत्र कार्रवाई क्यों नहीं की.
जांच एजेंसियों पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल
केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई और ED की अब तक इस मामले में कोई भूमिका नहीं रही है. बेंच ने भी सुनवाई के दौरान एजेंसियों की स्थिति पर सवाल उठाए. न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने पूछा कि अगर आरोप गंभीर थे तो एजेंसी निष्क्रिय क्यों रही, और क्या किसी संज्ञेय अपराध (cognisable offence) का खुलासा होने पर सीबीआई को कार्रवाई के लिए अदालत के निर्देश की जरूरत पड़ती है. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने यह भी टिप्पणी की कि अगर कोई अदालत निर्देश जारी करने का फैसला करती है, तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन अपेक्षित है.
याचिकाकर्ता का पक्ष: मामला अभी FIR-पूर्व चरण में
एस. विग्नेश शिशिर, जिन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में ऑनलाइन पेश हुए और राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि मामला अभी FIR-पूर्व चरण (pre-FIR stage) में है और दावा किया कि इस चरण में आरोपी को सुने जाने का अधिकार नहीं होता. याचिकाकर्ता ने पहले हाईकोर्ट में राहुल गांधी की संपत्ति से जुड़े आरोपों की सीबीआई-ED जांच की मांग की थी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 20 जुलाई को सीबीआई के जवाब पर असंतोष जताते हुए एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को जांच की प्रगति का विस्तृत हलफनामा व्यक्तिगत रूप से दाखिल करने का निर्देश दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि सीबीआई का पहले दाखिल हलफनामा उसके पूर्व आदेश का पालन नहीं करता और याचिकाकर्ता की शिकायत पर हुई प्रगति को पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं करता. कोर्ट ने नई दिल्ली स्थित सीबीआई के एंटी-करप्शन मुख्यालय के संबंधित जोन के संयुक्त निदेशक या प्रमुख को यह हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था.
मामले की कार्यवाही सीलबंद लिफाफे में
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरे केस रिकॉर्ड को वरिष्ठ रजिस्ट्रार की सुरक्षित हिरासत में सीलबंद लिफाफे में रखने का निर्देश दिया था. मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए बेंच खुली अदालत के बजाय चैंबर में सुनवाई कर रही थी. हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 20 अगस्त तय की थी और केंद्र सरकार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, राजस्व विभाग, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) सहित विभिन्न विभागों की ओर से विस्तृत जवाबी हलफनामे दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था.
आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के इस ताज़ा आदेश का मतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही फिलहाल टली रहेगी, जबकि शीर्ष अदालत हाईकोर्ट के निर्देशों को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर विचार करती रहेगी.
-ममता सिंह
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