उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनावों में भाजपा ने 6 और समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है. 48 घंटों से ज्यादा चली गणना के नतीजों में भाजपा के लिए लड्डू बाँटने जैसा कुछ नहीं रहा है. वाराणसी और लखनऊ सीट पर, जो जीतें सपा ने दर्ज की हैं, उससे भाजपाई खेमे में निराशा के संकेत देखे जा रहे हैं. जहाँ एक तरफ़ प्रधानमंत्री मोदी की सीट भाजपा पुनः हार गई है, तो वहीं लखनऊ सीट भाजपा के पाले से खिसक गई है. आइए इन चुनावी नतीजों के मायने समझते हैं.

चुनाव कहाँ-कहाँ हुए

उत्तर प्रदेश की 11 MLC सीटों पर चुनाव हुए थे. इनमें से जो 5 सीटें सपा के खेमे में आईं, वे निम्न हैं

  • वाराणसी शिक्षक
  • वाराणसी स्नातक
  • लखनऊ स्नातक
  • इलाहाबाद-झाँसी स्नातक
  • आगरा शिक्षक 

भाजपा के खाते में आई सीटें:

  • लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
  • मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
  • मेरठ-सहारनपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
  • गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
  • बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
  • आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

सपा की जीत

वाराणसी शिक्षक और स्नातक के साथ लखनऊ स्नातक क्षेत्र के समीकरण समझने से पहले, शेष सीटों के नतीजे देख लीजिए. इलाहाबाद-झाँसी स्नातक MLC सीट पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 वोटों से हराया है. 2020 में भी मान सिंह यादव ने भाजपा के डॉ. यज्ञदत्त शर्मा को 4,333 वोटों से शिकस्त दी थी.

आगरा शिक्षक MLC सीट पर सपा ने आखिरी वक्त में चुनाव मैनेज किया था. दरअसल, इस सीट से डॉ. आकाश अग्रवाल ने भाजपा के हरिकिशोर तिवारी को 4,263 वोटों से हराया है. 2020 में आकाश अग्रवाल इसी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरे थे और जीते थे. लेकिन, विश्लेषकों के अनुसार भाजपा इन नतीजों को पलट सकती थी, क्योंकि पिछले कुछ समय से ऐसी सुगबुगाहट थी कि अग्रवाल भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद में थे, लेकिन पार्टी ने हरिकिशोर तिवारी को जब उम्मीदवार बनाया, तब आकाश अग्रवाल सपा में शामिल हो गए.

भाजपा की जीत

उत्तर प्रदेश चुनावों से महीनों पहले हुए MLC चुनावों में भाजपा ने भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में अपनी साख बचा ली है. इसी कड़ी में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को 307 वोटों से हराया. त्रिपाठी को 14,887 वोट मिले, जबकि राजीव यादव को 14,580 वोट मिले. 2020 में त्रिपाठी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रत्याशी के रूप में जीते थे। उन्हें 11,154 वोट मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी अजय सिंह को 9,219 वोट मिले थे। इस तरह उन्होंने 1,935 वोटों से जीत हासिल की थी। गौरतलब है कि त्रिपाठी 2008, 2014 और 2020 में भी इस सीट से जीत चुके थे। 2020 में भाजपा ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था।

लखनऊ शिक्षक सीट पर भाजपा के उमेश द्विवेदी ने सपा के सुशील कुमार को 4,808 वोटों से हराया है. उमेश द्विवेदी को 13,179 और सुशील कुमार को 8,371 वोट मिले हैं. 2020 में भी उमेश द्विवेदी भाजपा के टिकट पर जीते थे. इस तरह उमेश द्विवेदी ने 2014, 2020 और 2026 में लगातार तीन बार यह सीट जीत ली है.

मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से श्रीचंद शर्मा ने बाज़ी मार ली है. सपा के डॉ. नितिन तोमर को 13,241 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी है. 2020 में श्रीचंद शर्मा ने भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज कर ओम प्रकाश शर्मा का करीब 48 साल पुराना वर्चस्व खत्म किया था.

मेरठ-सहारनपुर स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश कुमार गोयल ने सपा के प्रमेंद्र सिंह भाटी को 12,855 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार यह सीट जीत ली है. गोयल को 24,928 वोट मिले, जबकि भाटी के हिस्से 12,073 वोट आए. 2020 में गोयल ने चार बार के विजेता हेम सिंह पुंडीर को हराकर यह सीट भाजपा की झोली में डाली थी.

बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने सपा के हाजी दानिश अख्तर को 17,676 वोटों से हरा दिया है. ढिल्लों को 21,672 वोट मिले, जबकि दानिश अख्तर को 3,996 वोट मिले हैं. 2020 में भी हरि सिंह ढिल्लों भाजपा समर्थित उम्मीदवार के रूप में जीते थे. उन्हें 12,827 वोट मिले थे, जबकि सपा समर्थित उम्मीदवार संजय कुमार मिश्रा को 4,864 वोट मिले थे. इस तरह ढिल्लों ने 7,963 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी.

आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ‘गुरुजी’ ने सपा के शशांक यादव को हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है. 2020 में भी भाजपा जीती थी.

लखनऊ सीट का खेला

कुल 11 सीटों पर MLC चुनाव हुए. 10 सीटों पर 2020 के विजेताओं ने जीत दोहराई. लेकिन लखनऊ स्नातक MLC सीट इकलौती ऐसी सीट रही, जहाँ यह ट्रेंड लागू नहीं हुआ. इस सीट पर सपा ने भाजपा को शिकस्त दी है.

लखनऊ स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी की कांति सिंह ने भाजपा के मौजूदा MLC अवनीश कुमार सिंह को 17,127 वोटों से हराया है. कांति सिंह को 56,905 वोट मिले, जबकि अवनीश कुमार सिंह को 39,778 वोट मिले. जबकि 2020 में भाजपा के अवनीश कुमार सिंह ने कांति सिंह को 6,403 वोटों से हराकर यह सीट जीती थी. ऐसे में इस सीट की जीत अहम हो जाती है, क्योंकि यह इकलौती सीट है, जहाँ सही मायने में हार-जीत का खेल हुआ.

विश्लेषकों के अनुसार इस जीत को जनता का सीधा रुझान न माना जाए, लेकिन नैरेटिव के स्तर पर यह सपा के लिए कारगर साबित हो सकती है. प्रदेश की राजनीति में लखनऊ का दर्जा अलग है. यहाँ की जीत संख्या बल के लिहाज़ से भले ही मायने न रखे, लेकिन माहौल बनाने के लिए जरूरी है. जब कुछ महीनों में चुनाव हो और 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा न रहा हो, ऐसे में इस जीत-हार के मायने बढ़ जाते हैं.

वाराणसी शिक्षक और स्नातक

बहुचर्चित नतीजे वाराणसी से आए. सपा ने इस जीत को वैसे ही प्रचारित किया, जैसे अवधेश पासी और अयोध्या को 2024 में किया गया था. हालाँकि ये दोनों सीटें 2020 में भी सपा के उम्मीदवारों ने जीती थीं, लेकिन तत्कालीन माहौल अलग था. मोदी लहर पर प्रश्नचिह्न नहीं उठे थे और वाराणसी सांसद भारी अंतर से जीतकर संसद पहुँचे थे. 2024 के चुनावों ने ब्रांड मोदी को चोटिल किया है. 2014 और 2019 में नरेंद्र मोदी 3 और 4 लाख वोटों के अंतर से जीते थे. 2024 में यह अंतर 1.50 लाख पर सिमट गया था. साथ ही कई राउंड तक वे कांग्रेस के अजय राय से पीछे भी रहे थे. इन दोनों तथ्यों के मद्देनज़र वाराणसी की यथास्थिति भाजपा के कानों में चुभने वाली है. यही वजह थी कि CM योगी स्वयं प्रचार-प्रसार पर उतरे थे.

इतना हो-हल्ला जिन दो सीटों पर हो रहा है, उनका नाम वाराणसी शिक्षक और स्नातक है. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को अंतिम गणना में 5,015 वोटों से हराया. दिलचस्प बात तो यह है कि 2020 में भी लाल बिहारी यादव ने प्रमोद मिश्रा को इसी सीट पर 936 वोटों से हराया था. इससे पहले इस सीट पर शिक्षक-नेता चेतनारायण सिंह का दबदबा रहा है.

वहीं, वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को 19,932 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है. आशुतोष सिन्हा को 55,046 और केदारनाथ सिंह को 35,114 वोट मिले हैं. हालाँकि, मतगणना के दौरान लंबा-चौड़ा विवाद भी खिंचा. भाजपा की आपत्ति पर शाम करीब 4:30 बजे गिनती रोक दी गई. भाजपा ने आरोप लगाया कि अवैध मतपत्रों को गलत तरीके से हटाया गया है और दोबारा सत्यापन की माँग की. लेकिन सत्यापन के बाद परिणाम में कोई बदलाव नहीं हुआ. लंबे हो-हल्ले के बाद सपा प्रत्याशी को जीता घोषित कर दिया गया.

"उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनावों में भाजपा ने 6 और समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है. 48 घंटों से ज्यादा चली गणना के नतीजों मे…"