लगातार कई दिनों तक सांसदों के दबाव और अंदरूनी राजनीतिक अस्थिरता के बाद प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. उन्होंने न सिर्फ प्रधानमंत्री पद छोड़ा, बल्कि लेबर पार्टी के नेता के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी खत्म कर दी. 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर दिए गए अपने बयान में उन्होंने कहा कि उनके सभी फैसले देश के हित और देश के प्रति उनके प्यार को ध्यान में रखकर लिए गए थे.
इस्तीफे के बाद स्टार्मर का बयान
इस्तीफे के बाद स्टार्मर काफी भावुक नजर आए. उन्होंने अपने सहयोगियों, नंबर 10 के कर्मचारियों और सिविल सेवा के अधिकारियों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि इतने बड़े पद की जिम्मेदारी निभाने के बाद अब वे अपने परिवार को ज्यादा समय देना चाहते हैं. खासकर अपनी पत्नी विक, जिन्होंने हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया, और अपने बच्चों के लिए वे अब एक बेहतर पति और पिता बनना चाहते हैं. उन्होंने अपने परिवार को अपनी सबसे बड़ी ताकत और गर्व बताया.
7 साल में ब्रिटेन के पांचवें प्रधानमंत्री ने पद छोड़ा
पिछले लगभग 7 सालों में देश को कई प्रधानमंत्री बदलते देखने पड़े हैं. 2016 में ब्रेक्जिट जनमत संग्रह के बाद डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया था. उनके बाद थेरेसा मे आईं, लेकिन वे ब्रेक्जिट समझौते को संसद से पास नहीं करा सकीं और 2019 में हट गईं. इसके बाद बोरिस जॉनसन प्रधानमंत्री बने, लेकिन कोविड लॉकडाउन के दौरान विवादों और राजनीतिक दबावों के कारण उन्हें 2022 में इस्तीफा देना पड़ा.
जॉनसन के बाद लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों के कारण बाजार में भारी संकट आ गया और वे सिर्फ 49 दिनों में पद छोड़ने को मजबूर हो गईं। फिर ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने, लेकिन बढ़ती महंगाई, आर्थिक दबाव और चुनावी हार के बाद वे सत्ता में नहीं रह सके. अब स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ब्रिटेन में फिर नेतृत्व का संकट पैदा हो गया है.
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है. यहां प्रधानमंत्री को जनता सीधे नहीं चुनती, बल्कि संसद में बैठी उनकी पार्टी के सांसद चुनते हैं अगर पार्टी के सांसदों को लगे कि नेता लोकप्रिय नहीं है या चुनाव में हार का खतरा है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुन सकते हैं। इसी वजह से प्रधानमंत्री का पद काफी हद तक पार्टी के समर्थन पर निर्भर रहता है.
हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को भारी नुकसान हुआ. पार्टी ने कई सीटें खो दीं, जबकि नाइजल फराज की रिफॉर्म यूके पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया. इससे लेबर पार्टी के भीतर चिंता बढ़ गई कि वे अपने पारंपरिक श्रमिक वर्ग के वोटरों को खो रहे हैं.
इसके अलावा आर्थिक समस्याएं भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनीं.महंगाई, महंगे घर, कमजोर आर्थिक विकास और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव के कारण जनता में असंतोष बढ़ा. कई लोगों का मानना था कि सरकार ने राहत देने के लिए तेज और बड़े कदम नहीं उठाए.
सरकार को कुछ नीतियों पर आलोचना और विरोध के बाद यू-टर्न भी लेना पड़ा. कुछ फैसलों जैसे सर्दियों के ईंधन भत्ते में कटौती और कल्याणकारी सुधारों पर भारी विरोध हुआ. इसके साथ ही एक विवाद तब और बढ़ गया जब पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाया गया, जबकि उनके नाम का संबंध जेफ्री एपस्टीन जैसे विवादित व्यक्ति से जोड़ा गया.
UK मीडिया के मुताबिक अगले पीएम एंडी बर्नहम होंगे. एंडी बर्नहम ब्रिटेन की लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, पिछले हफ्ते उपचुनाव जीते है और सांसद बने है. वो 2001 से 2017 तक सांसद रहे और 2017 से ग्रेटर मैनचेस्टर के सीधे निर्वाचित मेयर हैं, इससे पहले वह ब्रिटेन में स्वास्थ्य मंत्री और संस्कृति मंत्री भी रह चुके हैं. हाल के सालों में बर्नहम की पहचान उत्तरी इंग्लैंड के मजबूत नेता के रूप में बनी है. कोविड काल में उन्होंने केंद्र सरकार से उत्तरी क्षेत्रों के लिए अधिक आर्थिक सहायता की मांग की थी, जिसके बाद मीडिया ने उन्हें King of the North कहना शुरू कर दिया.
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