ईरान वाशिंगटन से अपने सात-दिवसीय होर्मुज जलडमरूमध्य प्रस्ताव पर औपचारिक जवाब का इंतज़ार कर रहा है. 25 सितंबर को तेहरान ने यह प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जा सकता था और पूरे मध्य-पूर्व में जारी लड़ाई रुक सकती थी. लेकिन इससे पहले कि अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने खबर दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. हालाकी रॉयटर्स ने इस रिपोर्ट की तुरंत पुष्टि नहीं की है.  

ईरान का प्रस्ताव क्या है?
यह प्रस्ताव न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान तेहरान की ओर से रखा गया और कतर के मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका तक पहुंचाया गया. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इससे सात महीने से चल रहे उस युद्ध को खत्म किया जा सकता है, जिसने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक से तेल की आवाजाही को बाधित कर दिया है. 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों से कहा कि यह समझौता होते ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सात दिनों की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी. उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका की ओर से समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने को लेकर गंभीरता है, तो सब कुछ तैयार है.’

अराघची के मुताबिक, अगर वाशिंगटन सहमत होता है, तो दोनों पक्ष ‘आपसी सहमति वाले विषयों’ पर व्यापक बातचीत की ओर बढ़ सकते हैं, जिसमें संभावित रूप से ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी शामिल हो सकता है. 

प्रस्ताव की मुख्य बातें:

  • वाशिंगटन की सहमति मिलते ही सात दिन की उल्टी गिनती शुरू होगी
  • लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई रुकेगी
  • सात दिन बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जाएगा
  • अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा
  • ईरान का जमा किया गया धन वापस किया जाएगा
  • ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे
  • इसके बाद दोनों पक्ष व्यापक बातचीत शुरू करेंगे

हालांकि, रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने साफ किया कि अमेरिका के समझौता मान लेने पर भी तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई नरमी नहीं दिखाएगा. यूरेनियम संवर्धन को देश से बाहर भेजने के मामले में ईरान कोई समझौता नहीं करेगा. दूसरी ओर, ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाज़त कभी नहीं दी जाएगी. 

ट्रंप ने प्रस्ताव क्यों ठुकराया?
एक अमेरिकी अधिकारी ने अपनी पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर मध्यस्थों के ज़रिए हो रही बातचीत को ‘सकारात्मक और रचनात्मक’ बताया था. लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को निजी तौर पर संदेह है कि ईरान उनकी शर्तें पूरी करेगा, और उन्होंने अपने स्टाफ से कहा है कि बमबारी अभियान फिर शुरू होने की संभावना है. 

यह प्रस्ताव उन कई कूटनीतिक कोशिशों में से एक है जो अब तक सात महीने से चल रहे इस युद्ध को खत्म करने में नाकाम रही हैं. यह युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों से शुरू हुआ था. इसमें अब तक हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है, ईरान की पारंपरिक सैन्य ताकत कमज़ोर हुई है, और उसकी अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है. 

युद्ध पूरे क्षेत्र में कैसे फैला?
ईरान और उसके सहयोगियों ने इस लड़ाई को अपनी सीमाओं से बाहर तक फैला दिया है. ईरान, जो ओमान के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करता है, उसने खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं. वहीं तेहरान समर्थित हूती लड़ाकों ने यमन से सऊदी अरब के हितों को निशाना बनाया है. 

इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया पर एक पाइपलाइन हमले का आरोप है, जिसकी वजह से कुछ समय के लिए सऊदी तेल बाज़ार से बाहर हो गया था. लेबनान में हिज़्बुल्लाह अब भी इज़राइली सेनाओं से भिड़ा हुआ है. ईरान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अराघची ने अपने सऊदी समकक्ष प्रिंस फैसल बिन फरहान को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित शिपिंग मार्गों को लेकर ईरान और ओमान के बीच बनी सहमति के बारे में जानकारी दी. 

 

-ममता सिंह 

 

"ईरान वाशिंगटन से अपने सात-दिवसीय होर्मुज जलडमरूमध्य प्रस्ताव पर औपचारिक जवाब का इंतज़ार कर रहा है. 25 सितंबर को तेहरान ने यह प्रस्ताव रखा था…"