देश की अर्थव्यवस्था और कर अनुपालन (Tax Compliance) लगातार मजबूत बना हुआ है. जून 2026 में देश का सकल (Gross) GST संग्रह ₹1,94,812 करोड़ रहा. यह मई 2026 के ₹1,94,184 करोड़ की तुलना में ₹628 करोड़ अधिक है. यानी एक महीने में GST संग्रह में लगभग 0.32% की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, जून 2025 के मुकाबले संग्रह में 13.9% की सालाना बढ़ोतरी हुई है.
वित्त मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल में रिकॉर्ड GST संग्रह के बाद मई में मामूली नरमी आई थी, लेकिन जून में फिर हल्की बढ़त देखने को मिली. इससे संकेत मिलता है कि देश में उपभोग, व्यापारिक गतिविधियां और कर अनुपालन मजबूत बने हुए हैं.
हालांकि अप्रैल 2026 में GST संग्रह ₹2,42,702 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, लेकिन उसके बाद भी लगातार दो महीनों तक संग्रह ₹1.94 लाख करोड़ से ऊपर बना रहना मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत माना जा रहा है.
किन राज्यों का रहता है सबसे बड़ा योगदान?
हालांकि जून 2026 के राज्यवार आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन पिछले रुझानों के अनुसार महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा GST योगदानकर्ता बना हुआ है. इसके बाद कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और हरियाणा का स्थान आता है. इन राज्यों में आईटी, ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल, वित्तीय सेवाओं और बड़े कॉर्पोरेट मुख्यालयों की मौजूदगी के कारण GST संग्रह अधिक रहता है.
वहीं लक्षद्वीप, लद्दाख, अंडमान एवं निकोबार, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम जैसे छोटे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपेक्षाकृत कम GST संग्रह दर्ज करते हैं. इसका प्रमुख कारण सीमित औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां हैं.
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किन सेक्टरों से आता है सबसे अधिक GST?
सरकार मासिक आधार पर सेक्टरवार GST संग्रह का आधिकारिक डेटा जारी नहीं करती. हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग, आईटी सेवाएं, ई-कॉमर्स, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, रिटेल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र GST राजस्व में सबसे बड़ा योगदान देते हैं. दूसरी ओर कृषि क्षेत्र की अधिकांश गतिविधियां GST के दायरे से बाहर होने के कारण उसका योगदान अपेक्षाकृत कम रहता है.
क्या कहते हैं ये आंकड़े?
जून में GST संग्रह में दर्ज हुई बढ़ोतरी भले ही सीमित रही हो, लेकिन लगातार तीसरे महीने संग्रह का ₹1.9 लाख करोड़ से ऊपर बने रहना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है. मजबूत कर संग्रह से केंद्र और राज्यों दोनों की वित्तीय स्थिति बेहतर होती है, जिससे बुनियादी ढांचा, सामाजिक योजनाओं और पूंजीगत व्यय के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं. आने वाले महीनों में त्योहारी मांग और आर्थिक गतिविधियों में तेजी रहने पर GST संग्रह में और वृद्धि देखने को मिल सकती है.
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