यूरोपीय संघ (EU) ने अमेरिकी टेक दिग्गज Google पर 890 मिलियन यूरो (करीब 1 अरब डॉलर या ₹9,000 करोड़ से अधिक) का भारी जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई Digital Markets Act (DMA) के तहत की गई अब तक की सबसे बड़ी प्रवर्तन कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है. यूरोपीय आयोग का आरोप है कि Google ने अपने Search और Play Store प्लेटफॉर्म का उपयोग इस तरह किया, जिससे उसकी अपनी सेवाओं को प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अनुचित बढ़त मिली.
आयोग के अनुसार, Google ने Search परिणामों में Shopping, Hotels, Flights और अन्य सेवाओं को प्राथमिकता देकर प्रतिस्पर्धी कंपनियों की दृश्यता कम की. वहीं, Play Store में ऐप डेवलपर्स को वैकल्पिक भुगतान प्रणाली (Alternative Billing) और अन्य ऐप स्टोर की जानकारी देने से रोकने जैसी नीतियां भी DMA के नियमों का उल्लंघन करती पाई गईं.
इन मामलों में आयोग ने Search से जुड़े मामले में €460 मिलियन और Play Store से जुड़े मामले में €430 मिलियन का जुर्माना लगाया, जिससे कुल दंड €890 मिलियन हो गया.
क्या है Digital Markets Act (DMA)?
Digital Markets Act (DMA) यूरोपीय संघ का एक प्रमुख डिजिटल कानून है, जिसे बड़ी टेक कंपनियों की बाजार शक्ति पर नियंत्रण रखने और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है. यह कानून उन बड़ी कंपनियों पर लागू होता है जिन्हें "Gatekeepers" कहा जाता है. Gatekeeper कंपनियां अपने विशाल यूजर बेस और डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण बाजार पर बड़ा प्रभाव रखती हैं.
DMA के तहत ऐसी कंपनियों को अपनी सेवाओं को अनुचित तरीके से बढ़ावा देने, प्रतिस्पर्धियों के साथ भेदभाव करने या डेवलपर्स को सीमित करने की अनुमति नहीं है. यूरोपीय आयोग का कहना है कि Google ने इन नियमों का पालन नहीं किया.
आयोग ने कंपनी को अपने बिजनेस मॉडल और प्लेटफॉर्म में आवश्यक बदलाव करने का निर्देश भी दिया है. यदि Google तय समय सीमा में नियमों का पालन नहीं करती, तो भविष्य में उस पर और अधिक जुर्माना या अतिरिक्त नियामकीय कार्रवाई हो सकती है.
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Google ने फैसले का किया विरोध
Google ने यूरोपीय आयोग के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा है कि कंपनी पहले ही DMA के अनुरूप कई बदलाव कर चुकी है. कंपनी का दावा है कि आयोग का यह फैसला उपभोक्ताओं, ऐप डेवलपर्स और व्यवसायों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. Google ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले को यूरोपीय अदालत में चुनौती दे सकती है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर बड़ी टेक कंपनियों के नियमन की दिशा तय करेगा. भारत में भी Google Play Billing, ऐप स्टोर शुल्क, डिजिटल प्रतिस्पर्धा और बड़ी टेक कंपनियों के बाजार प्रभुत्व को लेकर लगातार बहस होती रही है.
यदि Google को अपने Play Store और Search मॉडल में बड़े बदलाव करने पड़ते हैं, तो उनका असर दुनिया भर के ऐप डेवलपर्स और डिजिटल कारोबार पर पड़ सकता है. भारतीय स्टार्ट अप्स, ऐप डेवलपर्स और नीति-निर्माताओं के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भविष्य में भारत में भी डिजिटल प्रतिस्पर्धा से जुड़े नियम और सख्त हो सकते हैं.
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