चुनाव आयोग ने विवादित Form 6 को लेकर नया फैसला लिया है. आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR से जुड़ी घोषणा को अब Form 6 से अलग कर दिया है. इस बदलाव के बाद अब वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन और SIR से जुड़ी घोषणा अलग-अलग भरनी होगी. इससे नए मतदाताओं के साथ-साथ SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम छूटने वाले लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है.
क्या है फॉर्म 6?
फॉर्म 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नए मतदाताओं का नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है. इसमें आवेदकों की उम्र, पता और परिवार के सदस्यों से जुड़ी सामान्य जानकारी मांगी जाती है. लेकिन SIR के दौरान ऑनलाइन Form 6 में एक अतिरिक्त SIR Declaration जोड़ा गया था. इसमें आवेदकों को तीन विकल्पों में से एक चुनना होता था.
- मेरा नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में मौजूद था.
- मेरे माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में मौजूद था.
- न मेरा और न ही मेरे माता-पिता का नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में मौजूद था.
पहले या दूसरे विकल्प को चुनने पर आवेदकों को विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और क्रम संख्या जैसी जानकारी भी देनी होती थी. इस घोषणा का जवाब दिए बिना आवेदक ऑनलाइन फॉर्म में आगे नहीं बढ़ सकते थे.
नए बदलाव से आवेदकों को राहत!
चुनाव आयोग के नए फैसले के मुताबिक, फॉर्म 6 और SIR Declaration को अलग-अलग कर दिया गया है. अब नए वोटर का आवेदन और SIR से जुड़ी घोषणा अलग-अलग भरनी होगी. यह बदलाव ECINet पोर्टल पर लागू किया गया है.
जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया जारी है, वहां भी नए मतदाताओं को फॉर्म 6 और SIR Declaration अलग-अलग भरना होगा. वहीं, जिन वोटर्स का नाम SIR प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था या जिनका नाम इसमें शामिल नहीं हो पाया था, वे भी फॉर्म 6 के जरिए दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से वोटर रहे व्यक्ति के फॉर्म 6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाने की कोशिश करने पर (सिर्फ इस वजह से) उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.
विवादों से क्यों घिरा था फॉर्म 6?
23 सितंबर 2026 को The Indian Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म 6 में SIR की घोषणा शामिल करने के फैसले पर चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई थी. रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों आयुक्तों का कहना था कि आयोग के कई बड़े फैसले उनकी जानकारी और सहमति के बिना लिए गए.
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को खारिज करते हुए कहा कि तीन सदस्यों वाले आयोग में इस तरह की चर्चा और सुझाव मिलना सामान्य बात है. आयोग ने यह भी कहा कि सभी अंतिम फैसले आपसी सहमति से लिए गए हैं.
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