दिल्ली में  चली 6 घंटे की लंबी बैठक के बाद कांग्रेस हाई कमान ने कर्नाटक के सत्ता परिवर्तन का रास्ता लगभग निकाल लिया है. फार्मूला यह है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को राज्य की राजनीति से निकालकर केंद्र की राजनीति में लाया जाए. इसके लिए उन्हें राज्यसभा भेजा जाएगा. इसके साथ ही  कांग्रेस सिद्धारमैया को 2029 के चुनाव के लिए एक बड़े ओबीसी चेहरे के रुप में देख रही है.


 

राहुल गांधी ने अकेले में की सिद्धारमैया से बात


 

26 मई को हुई इस बैठक में सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता शामिल हुए. बैठक के बाद राहुल गांधी ने सोनिया गांधी से भी बातचीत की. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने अकेले में सिद्धारमैया से बात की और उन्हें केंद्र की राजनीति में आने के लिए मना लिया है.


 

हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा कि यह बैठक सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं बल्कि राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव को लेकर थी. लेकिन सूत्रों का साफ कहना है कि बैठक का असली एजेंडा कर्नाटक का सत्ता परिवर्तन ही था.


 

18 जून से पहले होना है फैसला


 

18 जून को राज्यसभा के चुनाव होने हैं और नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है. यानी वक्त बहुत कम बचा है. कांग्रेस हाई कमान चाहती है कि 8 जून से पहले यह बात पक्की हो जाए. सत्ता परिवर्तन बिना किसी विवाद के डीके शिवकुमार के हाथ में चला जाए.


 

सिद्धारमैया के लिए क्या-क्या ऑफर


 

हाई कमान ने सिद्धारमैया के सामने केवल राज्यसभा का रास्ता नहीं रखा है. सूत्रों के मुताबिक उन्हें कहा गया है कि वे राज्य के प्रमुख से लेकर राज्यसभा तक जो भी पद रखना चाहें रख सकते हैं. इसके साथ-साथ उनके बेटे यतींद्र को राज्य के मंत्रिमंडल में शामिल करने का वादा भी किया गया है.


 

राहुल गांधी की ओबीसी राजनीति के लिए भी फायदेमंद


 

सिद्धारमैया ओबीसी वर्ग से आते हैं. राहुल गांधी लगातार ओबीसी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं. ऐसे में सिद्धारमैया का केंद्र में आना राहुल गांधी के उस एजेंडे के लिए भी काम का है. 2029 के लोकसभा चुनाव में ओबीसी का एक बड़ा और अनुभवी चेहरा पार्टी के पास होगा.


 

अब सिद्धारमैया के फैसले का इंतजार


 

सूत्रों के मुताबिक सिद्धारमैया ने हाई कमान से कहा है कि वे राज्य जाकर अपने करीबी नेताओं से बातचीत करेंगे और फिर अपना फैसला बताएंगे. लेकिन यह भी माना जा रहा है कि वे इतनी आसानी से मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ेंगे. यह भी हो सकता है कि वे किसी तीसरे नाम को इस रेस में लाकर खड़ा कर दें.


 

अगर ऐसा नहीं हुआ तो कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार होंगे. और कांग्रेस की कोशिश है कि 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाए.

 

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