पटना,अगस्त 14: बिहार में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदे गए प्लास्टिक डस्टबिन की कीमतों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि जो डस्टबिन खुले बाजार में करीब ₹1,500 में मिलता है, उसे सरकारी खरीद में ₹15,000 से ₹15,490 के बीच खरीदा गया, यानी बाजार भाव से करीब दस गुना ज्यादा कीमत पर.
आरोपों के मुताबिक 45 लीटर क्षमता वाले डस्टबिन की खरीद करीब ₹11,000 में, और 75 लीटर क्षमता वाले डस्टबिन की खरीद करीब ₹15,000 में की गई है. घोटाला सिर्फ कूड़ेदान तक ही सीमित नहीं रही,बल्कि कूड़ा रखने वाला पॉलीथिन बैग, जो बाजार में ₹2-5 में मिलता है, उसे करीब ₹90-96 में खरीदा गया है.
विपक्ष का आरोप है कि करीब 2 लाख डस्टबिन की खरीद पर सरकार ने लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि वाजिब कीमत पर यह खर्च करीब 30 करोड़ रुपये ही होना चाहिए था. कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 306 करोड़ रुपये के घोटाले के तौर पर भी बताया गया है.
यह पूरा मामला पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के कार्यकाल के दौरान हुई खरीद से जोड़ा जा रहा है, और आरटीआई (सूचना के अधिकार) के तहत मिली जानकारी के आधार पर सामने आया है.
खुलासा कैसे हुआ
यह मुद्दा एक बिहारी यूट्यूबर, संतोष सिंह की रिपोर्ट से सामने आया, जिसने बेगूसराय के एक व्यक्ति द्वारा दाखिल आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर यह दावा किया.
राजनीतिक हलचल
RJD नेता और लालू प्रसाद यादव की बेटी, रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया (X) पर सरकार पर तंज कसते हुए लिखा कि बिहार में डस्टबिन भी "वीवीआईपी" हो गया है, और छोटे कूड़ेदान के बदले बिल दस गुना बड़ा आया है. उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और मंत्री मंगल पांडेय से खरीद प्रक्रिया पर सवाल पूछे हैं.
सरकार/BMSICL का पक्ष
आरोपों पर बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) ने सफाई दी है.
नए प्रबंध निदेशक सुब्रत सेन के मुताबिक, जिस डस्टबिन पर विवाद है, वह कोई सामान्य कूड़ेदान नहीं बल्कि अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट के उपचार और संक्रमण नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाली माइक्रोवेव आधारित मशीन का एक हिस्सा है, इसलिए इसका कंटेनर और साथ इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन सामान्य प्लास्टिक बैग जैसी नहीं होती.
उन्होंने यह भी बताया कि यह खरीद उनके पूर्ववर्ती एमडी के कार्यकाल में हुई थी.
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
सत्ता पक्ष का कहना है कि यह अभी सिर्फ विपक्ष की ओर से लगाया गया आरोप है, कोई घोटाला अदालत या ऑडिट से साबित नहीं हुआ है.
मंत्री अशोक चौधरी ने भी जनसुनवाई के दौरान इस आरोप पर कोई सीधा जवाब ना देते हुए कहा कि जिस भी विभाग से यह मामला जुड़ा है, उसी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही इस पर समुचित और आधिकारिक जवाब दे सकते हैं. विभाग अपने स्तर पर तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करेगा, ऐसा उन्होंने आश्वासन दिया.
-ममता सिंह
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