पूरे भारत में इस वक्त कई औरतें करवा चौथ की तैयारियों में लगी हुई हैं. कोई नए कपड़े बनवा रही है, कोई मेंहदी लगवा रही है, तो कोई दूसरी तैयारियों में लगी हुई है. लेकिन इन तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश का एक ऐसा जिला भी है जहाँ औरतें चाह कर भी इन तैयारियों में शामिल नहीं हो सकती. 

जिस वक़्त गलियों में चाँद आने से पहले ही करवा चौथ की चमक साफ़ दिखाई देती है, उस वक़्त इस मोहल्ले में सड़कें सूनी और सन्नाटे से भरी नज़र आती हैं. करवा चौथ के दिन यहाँ की औरतें न तो व्रत रखती हैं, न ही रंग-बिरंगी चूड़ियां पहनती हैं और यहाँ तक कि सिंदूर भी नहीं लगाती हैं.

लड़ाई झगड़े में हत्या के बाद मिला पूरे गाँव को श्राप 

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के सुरीर कस्बे के 'बघा मोहल्ले' में आज भी लोग चाह कर भी करवा चौथ नहीं मनाते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस अनोखी परंपरा के पीछे एक ‘सती का श्राप’ जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि सदियों पहले इस गांव में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी का गौना कराकर भैंसा गाड़ी से घर लौट रहा था. जब वो बघा मोहल्ले से गुजरा, तो कुछ लोगों ने गाड़ी में जुते भैंसे को अपना बताकर लड़ाई-झगड़ा शुरू कर दिया.

बात इतनी बढ़ी कि लोगों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर उस ब्राह्मण को उसकी पत्नी के सामने ही मार दिया. पति की मौत होने के बाद, उसकी पत्नी वहीं सती हो गई. 

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सती होने से पहले उसने गाँव को श्राप दिया कि जो भी सुहागिन इस मोहल्ले में करवा चौथ का व्रत रखेगी या 16 श्रृंगार करेगी, मेरी तरह उसका सुहाग भी उजड़ जाएगा.

इस घटना के बाद इस गांव में कई जवान लड़कों की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई और कई अपशगुन होने लगे. जिसे लोगों ने सती का श्राप मानकर यहाँ 'सती माता का मंदिर' बनवा दिया. 

आज भी इस दिन यहाँ औरतें व्रत रखने के बजाय सिर्फ मंदिर में पूजा करती हैं.

"पूरे भारत में इस वक्त कई औरतें करवा चौथ की तैयारियों में लगी हुई हैं. कोई नए कपड़े बनवा रही है, कोई मेंहदी लगवा रही है, तो कोई दूसरी तैयारिय…"