मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी से बड़ी संख्या में वोटर आईडी कार्ड मिलने का मामला सामने आया है. 25 अक्टूबर को नदी किनारे सफाई अभियान चल रहा था, तभी लोगों की नजर पानी में तैरते मतदाता पहचान पत्रों पर पड़ी. इन्हें इकट्ठा कर गिना गया तो कुल 343 कार्ड निकले.

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ये कार्ड इंदौर की राऊ विधानसभा सीट के मतदाताओं के बताए जा रहे हैं. कार्डों पर वर्ष 2016 दर्ज है और उन पर इंदौर के तिलक नगर और आस्था पैलेस जैसे इलाके का पता लिखा हैं. यानी जिन कार्डों का संबंध इंदौर से बताया जा रहा है, वो वहां से करीब 90 किलोमीटर दूर खरगोन में नर्मदा किनारे मिले हैं. अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि वो नदी तक कैसे पहुंचे. 

इतनी बड़ी संख्या में पहचान पत्र मिलने की सूचना प्रशासन तक पहुंची तो खरगोन के जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाइक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मंडलेश्वर थाने पहुंचे. उन्होंने वहां शिकायत दर्ज कराई और मामले में एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की. 

इस बीच पुलिस की ओर से भी जानकारी दी गई है. मंडलेश्वर की SDOP श्वेता शुक्ला ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम ने सभी वोटर आईडी कार्ड जांच के लिए जब्त कर लिए हैं और पंचनामा तैयार किया गया है.

देश में चुनावी गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष पहले से लगातार सवाल उठा रहा है. कांग्रेस ने इस घटना को मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जोड़ा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी FIR दर्ज करने की मांग की है. विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और 'वोट चोरी' के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. पार्टी ने यह मांग भी रखी है कि गोताखोरों की मदद से नदी में तलाशी अभियान चलाया जाए, ताकि पता चल सके कि वहां और कितने कार्ड मौजूद हैं.

हालांकि, सिर्फ नदी में कार्ड मिलने से यह साबित नहीं होता कि मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई है या वोट चोरी की गई है. कार्ड वहां कैसे पहुंचे, यह किसकी लापरवाही का नतीजा है या इसके पीछे कोई और वजह है, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल पाएंगे.

 

-ममता सिंह 

"मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी से बड़ी संख्या में वोटर आईडी कार्ड मिलने का मामला सामने आया है. 25 अक्टूबर को नदी किनारे सफाई अभिया…"