अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (Senate) ने 16 सितंबर को रूस के खिलाफ एक बड़ा प्रतिबंध विधेयक मंजूर कर लिया है. ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम का यह बिल 262-159 वोटों से पास हुआ और अब यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा. कानून बनते ही ट्रंप के पास यह अधिकार आ जाएगा कि वो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देश, जिनमें भारत और चीन प्रमुख हैं, पर भारी टैरीफ लगा सकें. 

भारत और चीन के लिए क्या मायने हैं?
बिल का सबसे अहम हिस्सा वही है जो ऊर्जा खरीद से जुड़ा है. इसके तहत राष्ट्रपति को यह छूट मिलती है कि वो रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकें. सदन की नियम समिति के दस्तावेज़ों में भारत और चीन का नाम उन देशों में शामिल है जो इस दायरे में आ सकते हैं. 
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है, बिल सिर्फ राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है, फैसला आगे ट्रंप प्रशासन को लेना है. 

शैडो फ्लीट क्या है और यह मायने क्यों रखता है?
बिल में जिस ‘शैडो फ्लीट’ का ज़िक्र है, उसे समझना ज़रूरी है. जब पश्चिमी देशों ने रूस पर तेल निर्यात को लेकर प्रतिबंध और मूल्य सीमा (Price Cap) लगाई, तो रूस ने अपने तेल को बाज़ार तक पहुंचाने के लिए पुराने, अक्सर असुरक्षित टैंकर जहाज़ों का एक समानांतर बेड़ा खड़ा कर लिया. इन जहाज़ों की खास बात है की ये जहाज़ अस्पष्ट या शेल कंपनियों के नाम पर पंजीकृत होते हैं, जिससे असली मालिक का पता लगाना मुश्किल होता है. पकड़ में आने से बचने के लिए ये जहाज़ अक्सर अपना जीपीएस सिग्नल (AIS) बंद कर देते हैं, जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक नहीं हो पाती है. 
एक जहाज़ से दूसरे जहाज़ में बीच समंदर में तेल ट्रांसफर किया जाता है ताकि तेल का असली स्रोत छुपाया जा सके.  इसके साथ ही इनमें से कई जहाज़ उम्रदराज़ हैं और ठीक से बीमित भी नहीं होते, जिससे समुद्री दुर्घटना और तेल रिसाव का खतरा बढ़ जाता है. 

अनुमान है कि इस बेड़े में सैकड़ों जहाज़ शामिल हैं, और यही वह तरीका है जिससे रूस पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपना तेल बेचकर विदेशी मुद्रा कमाता रहा है. नया बिल इन्हीं जहाज़ों और इनसे जुड़े वित्तीय नेटवर्क को सीधा निशाना बनाता है. 

सदन में किसने क्या वोट दिया?
बिल के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सांसद ने मतदान किया, जबकि 7 रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने विरोध किया. डेमोक्रेट सांसदों की मुख्य आपत्ति यह थी कि इस बिल से राष्ट्रपति को टैरिफ को लेकर बहुत व्यापक अधिकार मिल जाते हैं. सीनेट पहले ही 7 अगस्त को इसे 86-11 के भारी बहुमत से पास कर चुकी थी. 

समय भी अहम
यह वोटिंग ऐसे समय हुई जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा प्रस्तावित है, और यह अमेरिकी मिड्टर्म चुनाव से पहले सदन के मौजूदा सत्र का आखिरी वोटिंग दिन भी था. बिल का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इसके लिए लंबे समय तक समर्थन जुटाया था. 

 

-ममता सिंह 

 

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