भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए सरकार ने 14 सितंबर को एक अहम अधिसूचना जारी किया है. वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजेक्शन और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर कोई भी बैंक या पेमेंट कंपनी किसी तरह का शुल्क नहीं वसूल सकती है. 
यह खबर आम आदमी के लिए राहत की है, लेकिन असली सवाल यह है कि ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट का क्या होगा? सरकार की इस अधिसूचना ने यह भी साफ कर दिया है कि बड़े ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने का दरवाज़ा अब खुल चुका है, और आने वाले दिनों में इसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी दिख सकता है. 

₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर लगेगा MDR, बड़े प्लेटफॉर्म होंगे सबसे पहले प्रभावित
सरकार ने जहाँ छोटे ट्रांजेक्शन को चार्ज से मुक्त रखा है, वहीं ₹2,000 से ऊपर के हाई-वैल्यू Person-to-Merchant यानी P2M UPI ट्रांजेक्शन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लगाने का रास्ता साफ हो गया है.
 रिपोर्ट्स के मुताबिक यह MDR करीब 0.4 फीसदी हो सकता है. शुरुआत में यह चार्ज Amazon, Flipkart जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लागू होगा. आंकड़े बताते हैं कि 2025-26 में कुल P2M UPI ट्रांजेक्शन में से सिर्फ 4 फीसदी पेमेंट ₹2,000 से ऊपर के थे, लेकिन कुल पेमेंट वैल्यू में इन्हीं का हिस्सा दो-तिहाई था. 
यानी तादाद में कम होने के बावजूद रकम के लिहाज से ये ट्रांजेक्शन सबसे भारी हैं. 2025-26 में देश में कुल 24,000 करोड़ से ज़्यादा UPI ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹314 लाख करोड़ रही.

MDR क्या होता है?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो किसी दुकानदार या कारोबारी को डिजिटल पेमेंट लेने के बदले अपने बैंक या पेमेंट कंपनी को चुकाना पड़ता है. डेबिट और क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर यह फीस पहले से लागू है, लेकिन दिसंबर 2019 में सरकार ने UPI को इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त कर दिया था. 
अब जबकि बड़े कारोबारियों के लिए UPI को कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर किया गया है, तो यह संभावना बन गई है कि ₹2,000 से ऊपर के बड़े UPI लेनदेन पर एक बार फिर MDR जैसा शुल्क लगाया जा सके.

जनवरी 2020 से था MDR से छूट का दौर
जनवरी 2020 से UPI और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट को MDR से पूरी तरह मुक्त रखा गया था, ताकि देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिल सके. सरकार ₹2,000 तक के छोटे ट्रांजेक्शन पर 0.15 फीसदी की दर से सब्सिडी भी देती रही. 2025-26 में यह सब्सिडी ₹2,196 करोड़ रही और 2026-27 के बजट में इसके लिए ₹2,000 करोड़ का अनुमान लगाया गया है. लेकिन हाल ही में संसद में पास हुए Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में बदलाव कर MDR लगाने का रास्ता खोल दिया.

UPI को टिकाऊ बनाना है असली मकसद
बैंक और पेमेंट कंपनियां सालों से यह मांग करती आ रही थीं कि बिना MDR के UPI इकोसिस्टम को चलाना आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है. वित्त मंत्रालय के Department of Financial Services के अनुसार P2M ट्रांजेक्शन पर हर साल करीब ₹20,700 करोड़ की लागत आती है, जबकि सरकार की सब्सिडी इसके मुकाबले बेहद कम है. Finance पर संसदीय स्थायी समिति ने भी मार्च में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि MDR की अनुपस्थिति UPI इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से अस्थिर बना रही है. वित्त मंत्रालय का कहना है कि यह बदलाव UPI को लंबे समय तक तकनीकी रूप से मज़बूत और सुरक्षित बनाए रखने के लिए ज़रूरी है.

अब देखना यह होगा कि ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर MDR कब से लागू होता है और क्या बड़े मर्चेंट इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालते हैं या खुद वहन करते हैं. फिलहाल छोटे ट्रांजेक्शन करने वाला आम उपभोक्ता सुरक्षित है, लेकिन बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करने वालों को आने वाले दिनों में अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ सकती है.

 

-ममता सिंह 

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