क्या आप जानते हैं कि भारतीय लोगों के पास बैंकों से बाहर कितनी नकदी मौजूद है? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार 15 जुलाई 2026 तक जनता के पास प्रचलन में मौजूद नकदी बढ़कर ₹42.12 लाख करोड़ हो गई है. यह वह राशि है, जो आम नागरिकों, व्यापारियों, दुकानदारों, कंपनियों और अन्य संस्थाओं के पास नकद के रूप में मौजूद है तथा बैंकिंग प्रणाली के बाहर प्रचलन में है.
RBI के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत से अब तक जनता के पास मौजूद नकदी में ₹98,264 करोड़ की वृद्धि हुई है. वहीं, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में यह राशि ₹4,82,992 करोड़ बढ़ी है, जो 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को दिखाती है. यह बताता है कि देश में नकदी का प्रवाह अभी भी मजबूत बना हुआ है, जबकि डिजिटल भुगतान का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है.
'जनता के पास प्रचलन में नकदी' का क्या अर्थ है?
इसका संबंध उन नोटों और सिक्कों से है, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है और जो लोगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों तथा अन्य संस्थाओं के पास प्रचलन में रहते हैं. इसमें बैंकों के कोषागार या तिजोरियों में रखें धन को शामिल नही किया जाता है. इसमें सिर्फ आम लोगों के पास रखी धन को ही बस गिना जाता है.
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अर्थव्यवस्था के लिए इसका क्या महत्व है?
जनता के पास नकदी बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं. इनमें आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी, बाजार में नकदी की बढ़ती मांग, त्योहारों के दौरान खर्च में वृद्धि तथा व्यापारिक लेनदेन शामिल हैं. हालांकि, केवल इस आंकड़े के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है. इसके लिए आय, रोजगार, महंगाई, उपभोग और निवेश जैसे अन्य आर्थिक संकेतकों का भी विश्लेषण आवश्यक होता है.
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