चंडीगढ़: पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को किसान संगठनों की तरफ से एक और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. किसान मजदूर मोर्चा (KMM) पांच दिन तक चलने वाला विरोध प्रदर्शन शुरू कर रहा है, जिसके तहत विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां समेत सरकार के सात मंत्रियों के घरों के बाहर धरना दिया जाएगा. इस सूची में पंजाब AAP के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा का नाम भी शामिल है.

इससे पहले भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) पहले ही मंत्रियों के घरों का घेराव शुरू कर चुकी है. ऐसे में अब KMM के मैदान में उतरने से किसानों का गुस्सा सीधे सत्ताधारी पार्टी के नेताओं तक पहुंचता दिख रहा है.

कुछ दिन पहले ही मोर्चे ने पंजाब के सभी 22 जिलों में डिप्टी कमिश्नर दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया था. इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा ने भी चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सात दिन तक धरना दिया. यानी बीते कुछ हफ्तों से पंजाब में किसान आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है.

16 सितंबर को होगा बड़ा फैसला
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने सरकार को साफ चेतावनी दी है की अगर मांगों पर गंभीरता से बातचीत शुरू नहीं हुई, तो 16 सितंबर की बैठक में आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया जाएगा. 

फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा धान की फसल के लिए बिजली और खाद की कमी है. लेकिन किसानों की मांगों की सूची इससे कहीं ज्यादा लंबी है. 

किसानों की प्रमुख मांगें
किसान मजदूर मोर्चा की मांगों में सबसे ऊपर है बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की सरकारी खरीद MSP पर सुनिश्चित करना. इसके साथ ही किसान संगठन चाहते हैं कि किसानों और खेत मजदूरों का पूरा कर्ज माफ किया जाए, और आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों को मुआवजा देने के साथ-साथ उन्हें सरकारी नौकरी भी दी जाए. मोर्चे ने बाढ़, गिरते भूजल स्तर और बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक नीति बनाने की मांग भी उठाई है. 

जमीन से जुड़े मुद्दों पर किसानों ने सरकार की लैंड पूलिंग नीति वापस लेने और भारतमाला परियोजना के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण रोकने की मांग की है. इसके अलावा वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान के साथ व्यापार फिर से शुरू करने की मांग भी शामिल है. 
किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार बीज अधिनियम 2025, सहकारी समितियां अधिनियम 2026 और बिजली संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित करे, साथ ही प्रीपेड बिजली मीटर लगाने की योजना को भी रद्द किया जाए. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी मोर्चे ने मांग रखी है कि पंजाब सरकार विधानसभा में स्पष्ट रूप से अपना विरोध दर्ज कराए. 

राजनीतिक दबाव बढ़ने के आसार
मंत्रियों के घरों तक प्रदर्शन ले जाने का फैसला यह संकेत देता है कि किसान आंदोलन अब सीधे राजनीतिक टकराव की दिशा में बढ़ रहा है. पंजाब सरकार पहले से ही कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों को लेकर दबाव में है. ऐसे में किसान संगठनों के लगातार आंदोलन से सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. 

KMM ने कहा है कि अगर सरकार बातचीत के लिए आगे नहीं आती, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है. 16 सितंबर की बैठक में क्या फैसला होता है, इस पर सबकी नजर टिकी है. 

 

-ममता सिंह 

"चंडीगढ़: पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को किसान संगठनों की तरफ से एक और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. किसान मजदूर मोर्चा (KMM)…"