जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अपना रुख और सख्त कर दिया है. संगठन का कहना है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते या उन्हें पद से नहीं हटाया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा. CJP के अनुसार, सरकार ने इस मुद्दे पर शनिवार दोपहर तक जवाब देने का समय मांगा है.

शुक्रवार को आंदोलन के बीच सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच दिल्ली के वीपी हाउस में करीब 45 मिनट तक बैठक हुई.

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP की ओर से आशुतोष रांका और सौरव दास मौजूद रहे.

बैठक में CJP ने सरकार के सामने साफ कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या पद से हटाया जाना है.

दो मांगों पर बनी सहमति, इस्तीफे पर फैसला बाकी

बैठक के बाद CJP ने दावा किया कि सरकार उनकी दो अन्य मांगों को मानने के लिए तैयार हो गई है. हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया.

संगठन का कहना है कि सरकार ने इस मुद्दे पर शनिवार दोपहर तक अपना जवाब देने का आश्वासन दिया है. तब तक जंतर-मंतर पर धरना पहले की तरह जारी रहेगा.

CJP का ऐलान 'इस्तीफे के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा'

CJP के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते या उन्हें पद से नहीं हटाया जाता, तो आंदोलन वापस लेने का कोई सवाल नहीं है.

उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार की ओर से सकारात्मक फैसला नहीं आने पर आंदोलन को देशभर में और व्यापक किया जाएगा.

सोनम वांगचुक का अनशन खत्म, लेकिन समाधान नहीं

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बाद उम्मीद थी कि सरकार और CJP के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलेगा.

हालांकि, शुक्रवार की बैठक के बाद भी सबसे अहम मुद्दे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई सहमति नहीं बन सकी. CJP ने दोहराया कि इस मांग के पूरा होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

राहुल गांधी ने भी सरकार पर बढ़ाया दबाव

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है.

राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगों में सबसे महत्वपूर्ण मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं करती, तब तक विपक्ष संसद की कार्यवाही को सामान्य रूप से नहीं चलने देगा.

उन्होंने सरकार से छात्रों के मुद्दों पर जवाब देने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की. विपक्ष का कहना है कि पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.


 

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