मणिपुर: तामेंगलोंग जिले में 13 सितंबर को दो अलग-अलग हमलों में चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं. दोनों घटनाएं जिले की दूरदराज कुकी बस्तियों, लोंगपी और तोल्लेन गांव, में हुईं है.
लोंगपी गांव में दोपहर करीब 3 बजे यह हमला हुआ, जब तीन ग्रामीण जरूरी सामान लेकर गांव लौट रहे थे. अज्ञात हथियारबंद लोगों ने उन पर हमला कर दिया, जिसमें एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई. मृतकों की पहचान जूली सिंगसों और थांगवेल (रोएल) गांगटे के रूप में हुई है. तीसरी व्यक्ति, जो एक महिला है, अब भी लापता बताई जा रही है और उसकी सुरक्षित होने की आशंका जताई जा रही है.
वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर्स (WVV) ने एक बयान में बताया कि हत्याओं के बाद हमलावर गांव के केंद्र की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ग्रामीणों ने कड़ा मुकाबला करते हुए उन्हें पीछे धकेल दिया. संगठन ने बताया कि जूली गर्भवती थीं, और इस हमले को ‘मानवता पर असहनीय हमला’ करार दिया, खासकर कुकी-जो समुदाय के खिलाफ.
दूसरी घटना तोल्लेन गांव में सुबह करीब 4 बजे हुई, जहां एक महिला और उसके पति की मौत हो गई, जबकि उनके बेटे को गंभीर चोटें आईं. मृतकों की पहचान लिंगजांगई सिंगसित और सीनेह सिंगसित के रूप में हुई है. असम राइफल्स के कैमाई बेस से पहुंचे जवानों ने घायलों को इलाज के लिए जिरीबाम पहुंचाया, लेकिन सीनेह बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ गए.
"ब्लैक डे" पर हुए हमले
इन दोनों घटनाओं का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये 13 सितंबर, यानी 'ब्लैक डे, के दिन हुईं. कुकी समुदाय इस दिन को शोक दिवस के रूप में मनाता है, जो 1990 के दशक की शुरुआत में कुकी-नागा जातीय संघर्ष में गई जानों की याद में समर्पित है.
इन हमलों ने एनएच-37 गलियारे पर रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. तोल्लेन गांव इसी संवेदनशील मार्ग के करीब है, जो इम्फाल और जिरीबाम को जोड़ता है.
तोल्लेन और लोंगपी दोनों गांव तामेंगलोंग जिले के क्रमशः तौसेम और नुंगबा उप-मंडल में स्थित हैं. इनसे कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित कैमाई गांव मुख्य रूप से नागा समुदाय की बस्ती है.
संगठनों और नेताओं की प्रतिक्रिया
मणिपुर की कुकी नागरिक सामाजिक संस्थाओं (सीएसओ) ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए तुरंत, निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है. संगठनों ने कहा है कि दोषियों की पहचान ठोस सबूतों के आधार पर की जाए और उन पर कानूनी कार्रवाई हो.
वहीं कैमाई नागा विलेज अथॉरिटी ने भी हमलों की निंदा की और हमलावरों को ‘अज्ञात समूह’ बताते हुए चिंता जताई कि इस घटना से क्षेत्र में रहने वाले अलग-अलग समुदायों के बीच शक और दूरियां बढ़ सकती हैं. अथॉरिटी ने सभी समुदायों से संयम बरतने और सामुदायिक नेताओं व संगठनों से शांति और आपसी समझ को फिर से मजबूत करने की अपील की है.
सैकुल की विधायक किमनेओ हाओकिप हांगशिंग ने इस घटना को ‘बर्बर और निर्मम हत्या’ बताते हुए कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि निहत्थे और निर्दोष नागरिकों पर की गई ऐसी हिंसा न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि मानव जीवन, शांति और सभ्य समाज के मूल सिद्धांतों पर भी गंभीर हमला है. उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं, बच्चों और असहाय नागरिकों को निशाना बनाना कायरता है, जिसकी हर स्तर पर निंदा होनी चाहिए, और किसी भी विचारधारा या शिकायत के नाम पर ऐसे जघन्य अपराधों को उचित नहीं ठहराया जा सकता.
हेंगलेप के विधायक लेतजामांग हाओकिप ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की जान जाना एक गंभीर त्रासदी है और यह लोगों में बनी असुरक्षा की भावना की गहरी याद दिलाता है. उन्होंने कहा कि निहत्थे नागरिकों के खिलाफ ऐसी हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे आगे जारी नहीं रहने देना चाहिए.
ये हमले मणिपुर में मई 2023 से चल रहे मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुए हैं, जो तीन साल से अधिक समय बाद भी थमा नहीं है. हाल के महीनों में कुकी और नागा बस्तियों के बीच भी हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे राज्य की सुरक्षा स्थिति और नाजुक हो गई है. अब तक हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है और मामले की जांच जारी है.
-ममता सिंह
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