भारत का IT और सॉफ्टवेयर सर्विसेज सेक्टर विदेशी बाजारों से लगातार कमाई कर रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 2025-26 के वार्षिक सर्वे के अनुसार, भारत का कुल सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात 8.2% की वार्षिक वृद्धि के साथ 221.4 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹19.55 लाख करोड़) तक पहुंच गया है.

अगर इसमें भारतीय कंपनियों की विदेशों में स्थित शाखाओं (Foreign Affiliates) के स्थानीय कारोबार को भी शामिल कर लिया जाए, तो कुल आंकड़ा 239.3 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹21.14 लाख करोड़) हो जाता है, जिसमें 9.5% की बढ़त दर्ज की गई है.

सर्वे के मुख्य आंकड़े (Key Highlights)

  • कंप्यूटर सेवाओं से सबसे ज्यादा कमाई: कुल सॉफ्टवेयर निर्यात में कंप्यूटर सेवाओं (Computer Services) का हिस्सा 69.3% रहा, जिससे 153.4 अरब डॉलर का निर्यात हुआ. इसमें IT सर्विसेज, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल सपोर्ट शामिल हैं.

     

  • ITES और BPO सेक्टर: आईटी-सक्षम सेवाओं (ITES) का हिस्सा 30.7% ($68.0 अरब) रहा. इसमें BPO सेवाएं सबसे बड़ा घटक ($56.0 अरब) बनी हुई हैं, जबकि इंजीनियरिंग सेवाओं का निर्यात $12.0 अरब रहा.

     

  • अमेरिका और यूरोप सबसे बड़े बाजार: भारतीय IT कंपनियों के लिए अमेरिका (54.1%) सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है. इसके बाद यूरोप (31.8%) का नंबर आता है, जिसमें ब्रिटेन ($34.0 अरब) प्रमुख बाजार रहा.

 

  • 91.7% काम Off-site मोड से: कुल सेवाओं का 91.7% हिस्सा Off-site मोड (भारत में बैठकर काम करना) के जरिए पूरा किया गया. On-site काम (विदेश जाकर काम करना) का हिस्सा घटकर 8.3% रह गया है.

     

  • डॉलर में भुगतान: निर्यात का 72.6% भुगतान अमेरिकी डॉलर में हुआ, जिसके बाद यूरो (9.6%) और भारतीय रुपये (6.3%) का स्थान रहा.

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आम आदमी और नौकरियों पर क्या होगा असर?

IT सेक्टर में काम की मांग बनी रह सकती है:
विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय IT और डिजिटल सेवाओं की मांग बनी रहने से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, क्लाउड, साइबर सुरक्षा और BPO सेवाओं में काम की जरूरत बनी रह सकती है. हालांकि, निर्यात बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि उसी अनुपात में नई नौकरियां भी निश्चित रूप से बढ़ेंगी, क्योंकि कंपनियां ऑटोमेशन और AI का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा रही हैं.

रिमोट और डिजिटल वर्क के अवसर:

91.7% काम Off-site होने से यह पता चलता है कि IT सेवाएं भारत में बैठकर ही विदेशों तक पहुंचाई जा रही हैं. इससे बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों के कुशल पेशेवरों (Skilled Professionals) के लिए भी रिमोट और डिजिटल वर्क के अवसर बन सकते हैं.

विदेशी मुद्रा (Forex) का आगमन:

220 अरब डॉलर से अधिक का यह निर्यात देश में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा लाता है. इससे भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) को सहारा मिलता है. हालांकि, रुपये की कीमत पर कच्चे तेल के दाम, आयात बिल और वैश्विक बाजार जैसे कई कारकों का असर पड़ता है, इसलिए इसे सीधे रुपये के मजबूत होने की गारंटी नहीं माना जा सकता.

नई स्किल्स की जरूरत:

आने वाले समय में केवल पारंपरिक कोडिंग पर्याप्त नहीं होगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स और एडवांस डिजिटल टेक्नोलॉजीज में कुशल पेशेवरों की मांग अधिक रहने की संभावना है.

 

RBI के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारतीय IT सेक्टर वैश्विक बाजारों में अपनी पकड़ बनाए हुए है. डिजिटल सेवाएं और BPO भारत के लिए विदेशी मुद्रा कमाने और रोजगार को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण जरिया बने हुए हैं. आने वाले समय में AI, ऑटोमेशन और नई टेक्नोलॉजी स्किल्स इस क्षेत्र के रोजगार और कारोबार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.

 

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