उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं. खासकर 30 साल की उम्र के बाद अपनी सेहत को लेकर थोड़ा ज्यादा सतर्क रहना जरूरी हो जाता है.
इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला को हर साल ढेर सारे टेस्ट करवाने चाहिए. जरूरत के हिसाब से सही जांच करवाना ज्यादा जरूरी है.
महिला विशेषज्ञ डॉ. त्रिप्ति के मुताबिक, 30 की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी बेसिक हेल्थ पर नजर रखनी चाहिए. इसके लिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच की जा सकती है.
लगातार थकान को सिर्फ काम का दबाव न समझें
आजकल कई महिलाएं थकान और कमजोरी को काम के दबाव या बिजी लाइफ का हिस्सा मानकर छोड़ देती हैं. लेकिन अगर थकान लगातार बनी हुई है तो इसकी वजह जानना जरूरी है.
डॉ. त्रिप्ति के मुताबिक, अगर लगातार थकान, कमजोरी या शरीर में दर्द रहता है तो डॉक्टर की सलाह से CBC, आयरन, विटामिन D और विटामिन B12 जैसे टेस्ट करवाए जा सकते हैं.
इन जांचों से शरीर में खून और कुछ जरूरी पोषक तत्वों की स्थिति का पता चल सकता है. हालांकि हर महिला को ये सभी टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं होती. इसलिए पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
पीरियड्स में बदलाव हो तो ध्यान दें
महिलाओं को अपने पीरियड्स के पैटर्न पर भी ध्यान देना चाहिए. अगर पीरियड्स समय पर नहीं आ रहे हैं, ब्लीडिंग का पैटर्न बदल गया है या कोई नया लक्षण नजर आ रहा है, तो डॉक्टर से बात करनी चाहिए.
30 से 40 साल की उम्र के बीच कुछ महिलाओं में पेरिमेनोपॉज के बदलाव भी शुरू हो सकते हैं. इस दौरान गर्मी ज्यादा लगना, नींद खराब होना, वजन बढ़ना या मूड में बदलाव जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
इन लक्षणों को सिर्फ तनाव या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
सर्वाइकल और ब्रेस्ट हेल्थ का भी रखें ध्यान
महिलाओं की सेहत के लिए सिर्फ ब्लड टेस्ट ही जरूरी नहीं हैं. सर्वाइकल हेल्थ और ब्रेस्ट हेल्थ की स्क्रीनिंग भी समय पर करवाना जरूरी है.
किस महिला को कौन-सी जांच और कितनी बार करवानी है, यह उसकी उम्र, सेहत और व्यक्तिगत जोखिम को देखकर डॉक्टर तय कर सकते हैं.
इसलिए 30 की उम्र के बाद बिना जरूरत हर टेस्ट करवाने के बजाय अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें. कोई परेशानी लगातार बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लें.
साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन, सप्लीमेंट या कोई दवा खुद से शुरू न करें.
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