दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है. चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के एक पोलिंग बूथ से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़ों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जहां दर्ज 909 मतदाताओं में से 908 के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं.

मामला क्या है?
यह आंकड़ा सबसे पहले कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसे बाद में कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी उठाया. भारद्वाज के अनुसार, चांदनी चौक के बूथ नंबर 33 पर 1 जनवरी 2025 की मतदाता सूची में कुल 909 नाम दर्ज थे. 
SIR प्रक्रिया के दौरान इनमें से 728 नाम हटाए गए, जबकि 180 नाम इससे पहले की 'प्री-SIR मैपिंग एक्सरसाइज' में ही सूची से बाहर कर दिए गए थे. इस तरह कुल 908 नाम हटने के बाद बूथ पर अब सिर्फ एक ही मतदाता शेष बचा है.

अन्य रिपोर्टों के अनुसार, यह बूथ अब बदलकर नंबर 38 हो गया है और यमुना नदी के किनारे बसे जेजे क्लस्टर बेला एस्टेट, विजय घाट से जुड़ा है. सूची में बचे इकलौते मतदाता स्थानीय हनुमान मंदिर के महंत बताए जा रहे हैं.

प्रशासन का पक्ष
BLO-BLA (बूथ लेवल ऑफिसर-बूथ लेवल एजेंट) बैठक के रिकॉर्ड के मुताबिक, हटाए गए 729 में से 632 मतदाताओं को 'स्थानांतरित' (शिफ्टेड), 42 को 'मृत', 10 को 'डुप्लीकेट', एक को 'अनुपस्थित' और 43 को 'अन्य' श्रेणी में दर्ज किया गया है. 
सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी सुनील कुमार ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि बेला एस्टेट के निवासियों के पास न बिजली का बिल है, न पानी का, न ही पक्के मकान, वे सरकारी (डीडीए की) ज़मीन पर 'अनधिकृत' रूप से रह रहे हैं, यही वजह बताई जा रही है कि उनके नाम सूची से हटाए गए.

स्थानीय निवासियों और विपक्ष का आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे दशकों से इसी इलाके में रह रहे हैं. एक निवासी ने बताया कि उसके दादा और पिता 1961 से यहीं वोट डालते आए हैं. कई परिवारों ने SIR के दौरान एनुमरेशन फॉर्म जमा किए थे और उनके पास बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की ओर से दी गई पावती (acknowledgment) भी मौजूद है, बावजूद इसके उनके नाम अंतिम सूची से गायब हैं.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मामले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी और सुप्रीम कोर्ट से SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर यह मामला SIR की ‘भयावह हकीकत’ उजागर नहीं करता, तो और क्या करेगा. 
सुप्रिया श्रीनेत ने भी सवाल उठाया कि क्या मतदाता बनने का अधिकार केवल ज़मीन या मकान के मालिकों तक सीमित है, जबकि चुनाव आयोग के अपने नियमों के अनुसार बेघर नागरिक भी मतदाता के रूप में पंजीकृत हो सकते हैं.

बड़ी तस्वीर
यह इकलौता मामला नहीं है. दिल्ली में समूची SIR प्रक्रिया के तहत करीब 47.7 लाख नाम, यानी शहर के कुल मतदाताओं का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा, ड्राफ्ट सूची से बाहर हो गया है. अकेले चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 39 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात सामने आई है.

सावधानी का पहलू
गौरतलब है कि ये आंकड़े और आरोप मुख्य रूप से विपक्षी दल के नेताओं और नागरिक समाज संगठनों की ओर से सामने आए हैं. चुनाव आयोग ने इस विशिष्ट बूथ को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, हालांकि आयोग बिहार और पश्चिम बंगाल में इसी तरह के आरोपों को पहले ‘राजनीतिक लाभ के लिए फैलाया गया झूठा नैरेटिव’ करार दे चुका है. 

 

-ममता सिंह 

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