चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के नवनियुक्त एआईसीसी प्रभारी सचिन पायलट ने स्पष्ट किया है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस किसी मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा नहीं करेगी. पायलट ने कहा कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व मॉडल के तहत चुनाव लड़ेगी, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अभियान की अगुवाई करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर फैसला पार्टी के बहुमत हासिल करने के बाद ही लिया जाएगा.
पुरानी परंपरा से अलग रुख
अगर कांग्रेस अपने ‘चुनाव से पहले कोई सीएम चेहरा नहीं’ वाले रुख पर कायम रहती है, तो यह पिछली रणनीतियों से एक बड़ा बदलाव होगा. गौरतलब है कि पार्टी ने 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा था, जबकि 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम फेस के तौर पर पेश किया गया था.
गुटबाजी अब भी बरकरार
पायलट के पंजाब दौरे के बावजूद पार्टी के भीतर मतभेद खत्म होते नहीं दिख रहे. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के गुटों के बीच कर्मचारियों की शिकायतों, कानून-व्यवस्था और गुलज़ार सिंह की मौत जैसे मुद्दों पर टकराव जारी है.
गुलज़ार सिंह की मौत को लेकर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे की नशे की लत से जुड़े विवाद के बीच कथित तौर पर जहर खा लिया था.
बताया जा रहा है कि पार्टी के दोनों प्रमुख खेमे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ किसी साझा मोर्चे की बजाय अपने-अपने अलग राजनीतिक कार्यक्रम चला रहे हैं, जिससे सत्तारूढ़ दल के खिलाफ पार्टी का हमला कमजोर पड़ता दिख रहा है.
7 सितंबर को चन्नी और उनके करीबी नेताओं ने हल्द्वानी में एक कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर जालंधर में भाजपा और RSS के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन किया. इसके उलट, अगले दिन चंडीगढ़ में वड़िंग द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन में चन्नी खेमे ने हिस्सा नहीं लिया.
मोहनजीत सिंह मामले को लेकर अलग सक्रियता
वहीं, वड़िंग ने अलग से संगरूर के एक अस्पताल में मोहनजीत सिंह से मुलाकात की. आरोप है कि किसी कार्यक्रम में काला झंडा दिखाने के बाद पंजाब पुलिस ने कथित तौर पर मोहनजीत सिंह के साथ मारपीट की थी. बताया जाता है कि वड़िंग ने राहुल गांधी और मोहनजीत सिंह के बीच फोन पर बातचीत भी करवाई.
सचिन पायलट का यह बयान भले ही पंजाब कांग्रेस को एक ‘सामूहिक नेतृत्व’ के सूत्र में बांधने की कोशिश जैसा दिखे, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है. चन्नी और वड़िंग गुटों के बीच जारी खींचतान, अलग-अलग विरोध प्रदर्शन और आपसी समन्वय की कमी यह दर्शाती है कि पार्टी के भीतर की दरार अभी भी भरी नहीं है.
2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन अगर कांग्रेस अपनी अंदरूनी गुटबाजी को समय रहते नहीं सुलझा पाई, तो ‘सीएम फेस न देने’ की यह नई रणनीति सामूहिक नेतृत्व की मजबूती से कम, पार्टी की आंतरिक बिखराव को छिपाने की कोशिश ज्यादा साबित हो सकती है.
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी और सचिन पायलट का हस्तक्षेप गुटों को एकजुट कर पाता है, या पंजाब कांग्रेस का यह आंतरिक संघर्ष चुनाव तक इसी तरह जारी रहता है.
-ममता सिंह
"चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के नवनियुक्त एआईसीसी प्रभारी सचिन पायलट ने स्पष्ट किया है कि 2027 विधानसभा चु…"
