पंजाब की राजनीति में भाजपा की 'अकेले चलो' रणनीति अब ठोस आकार लेती दिख रही है. भगवा पार्टी ने अपने पुराने सहयोगी रहे बादल परिवार के गढ़ में सेंध लगाते हुए दिवंगत मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के चचेरे भाई और उनके पूर्व राजनीतिक सलाहकार मेजर (सेवानिवृत्त) भूपिंदर सिंह ढिल्लों को अपने पाले में शामिल किया है.
 मेजर ढिल्लों अपने पुत्र अमरदीप सिंह 'बावा बादल' के साथ शाम 5 बजे भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे.

कैसे हुआ शामिल होने का ऐलान
चंडीगढ़ स्थित पंजाब भाजपा के प्रदेश कार्यालय में यह औपचारिक घोषणा होगी. इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों सहित पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व मौजूद रहेगा. 
78 वर्ष की आयु में मेजर ढिल्लों का यह कदम पंजाब की राजनीति में एक बड़े प्रतीकात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे पहले मनप्रीत सिंह बादल को भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर बादल खानदान से जोड़ चुकी है.

फौजी अफसर से राजनीतिक सलाहकार तक का सफर
मेजर ढिल्लों की पृष्ठभूमि भारतीय सेना से जुड़ी रही है. प्रतिष्ठित 'द लॉरेंस स्कूल', सनावर से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने NDA (खड़गवासला) और IMA (देहरादून) से सैन्य प्रशिक्षण लिया. 
1969 में सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर सेना में कमीशन पाने वाले ढिल्लों 1983 में मेजर पद से सेवानिवृत्त हुए. इसके बाद 2012 में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान प्रकाश सिंह बादल ने उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देते हुए अपना राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किया था.

लंबी सीट पर चुनाव लड़ने की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक भाजपा मेजर ढिल्लों को बादल परिवार के पारंपरिक गढ़ लंबी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी में है. यह सीट अकाली दल के लिए भावनात्मक और राजनीतिक दोनों ही लिहाज़ से बेहद अहम रही है, ऐसे में इस कदम को पार्टी के परंपरागत वोट बैंक में सीधी सेंध के तौर पर देखा जा रहा है.

नाराज़गी बनी वजह
रिपोर्ट्स के अनुसार मेजर ढिल्लों लंबे समय से शिरोमणि अकाली दल में उपेक्षा महसूस कर रहे थे. प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद पार्टी में उनकी पहले जैसी अहमियत नहीं रह गई थी, जिससे नाराज़गी बढ़ती गई.
 पिछले अप्रैल में रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के बाद हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी का उनके चंडीगढ़ आवास पर हाल-चाल जानने पहुंचना भी इसी राजनीतिक हलचल की शुरुआती कड़ी मानी जा रही थी.

बड़ा सियासी संदेश
मेजर ढिल्लों का भाजपा में आना 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भगवा पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़कर संगठनात्मक मजबूती हासिल करना चाहती है. हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या इस तरह के 'उधार के नेतृत्व' पर निर्भरता भाजपा के लिए जमीनी स्तर पर वोट में तब्दील होगी, या फिर यह सिर्फ प्रतीकात्मक बढ़त बनकर रह जाएगी.

 

-ममता सिंह 

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