करीब 36 दिनों तक हजारों छात्रों, नारों और पोस्टरों से गूंजता रहा दिल्ली का जंतर-मंतर अब फिर से अपने पुराने रंग में लौटता नजर आ रहा है. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा बाद शनिवार रात CJP ने आंदोलन समाप्त हो गया. जिसके बाद से धरना स्थल पर टेंट हटने लगे, मंच समेटा जाने लगा और प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौट ने लगे.

पिछले कई दिनों से जिन सड़कों पर प्रदर्शन, बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल तैनात था, वहां अब सफाई अभियान चल रहा है और सामान्य आवाजाही लौटने लगी है. जंतर-मंतर और आसपास का इलाका धीरे-धीरे अपनी सामान्य रफ्तार पकड़ रहा है.

हालांकि आंदोलन खत्म होने से राजधानी में हालात सामान्य होने लगे हैं, लेकिन यह प्रदर्शन अपने पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक सवाल भी छोड़ गया है.

धरने से राष्ट्रीय बहस तक का सफर

करीब चार सप्ताह तक चले इस आंदोलन ने सिर्फ जंतर-मंतर तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि देशभर में NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर बहस छेड़ दी. आंदोलन के दौरान हजारों छात्र यहां पहुंचे. सोशल मीडिया पर इस विरोध की तस्वीरें और वीडियो लगातार वायरल होते रहे. सुरक्षा कारणों से संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में कड़े प्रतिबंध लगाए गए. कई मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ा. अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र सरकार से मिले आश्वासन के बाद CJP ने धरना समाप्त करने का फैसला लिया. इसके साथ ही प्रशासन ने भी सामान्य व्यवस्था बहाल करने की प्रक्रिया तेज कर दी है.

धरना स्थल हुआ खाली, छात्रों ने ली आखिरी सेल्फी

जंतर-मंतर पर धरना खत्म होने के बाद शनिवार देर रात से पूरा इलाका धीरे-धीरे खाली होने लगा. CJP के पदाधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की, जिसके बाद हजारों लोगों से भरा धरना स्थल कुछ ही घंटों में खाली हो गया.

जाते समय कई छात्र मंच के सामने सेल्फी लेते नजर आए. वहीं, वालंटियर पूरे इलाके में फैला कूड़ा साफ करते दिखे. आंदोलन के दौरान भोजन, पानी और दूसरी सुविधाएं देने वाले सामाजिक संगठनों ने भी अपना सामान समेटना शुरू कर दिया. देर रात तक जंतर-मंतर पूरी तरह क्लियरेंस मोड में आ चुका था.

धरना खत्म होते ही NDMC ने भी सफाई अभियान शुरू कर दिया. कर्मचारियों ने पूरी रात जंतर-मंतर और आसपास की सड़कों की सफाई की, ताकि रविवार सुबह तक इलाका फिर से सामान्य हो सके.

jantar mantar after protest

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प्रदर्शन के बाद जंतर मंतर

मेट्रो सेवाएं फिर से हुईं शुरू

CJP का आंदोलन खत्म होने के कुछ ही समय बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने केंद्रीय दिल्ली के सभी 18 मेट्रो स्टेशनों पर सामान्य सेवाएं शुरू कर दीं. सुरक्षा कारणों से पिछले चार दिनों से इन स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद थे.

DMRC ने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि अब सभी स्टेशन पूरी तरह खुल चुके हैं और यात्री पहले की तरह सामान्य तरीके से सफर कर सकते हैं. इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिली, जिन्हें पिछले कुछ दिनों से बंद स्टेशनों की वजह से लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा था.

जिन स्टेशनों पर अब सामान्य आवाजाही शुरू हो गई है, उनमें लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, शिवाजी स्टेडियम, झंडेवालान और नई दिल्ली शामिल हैं.

रात को चला सफाई अभियान  

धरना खत्म होते ही NDMC ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में विशेष सफाई अभियान शुरू कर दिया. देर रात तक कर्मचारी सड़कों, फुटपाथों और धरना स्थल की सफाई में जुटे रहे. आंदोलन के दौरान लगाए गए टेंट, बैरिकेड, पोस्टर और दूसरे अस्थायी ढांचों को भी हटाया गया, ताकि रविवार सुबह तक पूरा इलाका फिर से सामान्य हो सके.

NDMC के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि सभी अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं. उन्होंने कहा, "धरना समाप्त हो गया है और ज्यादातर लोग जा चुके हैं. हमारा लक्ष्य है कि सुबह तक पूरे इलाके की सफाई पूरी कर दी जाए. सभी कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी और उत्साह के साथ काम कर रहे हैं."

आंदोलन खत्म, लेकिन कई सवाल बाकी

करीब 26 दिनों तक चला CJP का आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन इसने देशभर में एग्जाम सिस्टम, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ी बहस छेड़ दी है. जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह विरोध धीरे-धीरे कई राज्यों तक पहुंचा. सोशल मीडिया पर भी इस आंदोलन ने व्यापक चर्चा बटोरी. आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र सरकार से मिले आश्वासन के बाद CJP ने धरना समाप्त करने का फैसला लिया.

धरना खत्म होने के बाद राजधानी अब सामान्य होती दिख रही है. जंतर-मंतर से मंच हट चुका है, टेंट समेट दिए गए हैं, इंटरनेट सेवा बहाल हो गई है और 18 मेट्रो स्टेशन फिर से खुल गए हैं. लेकिन यह आंदोलन अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया है. क्या परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार होंगे? क्या पेपर लीक रोकने के लिए नए कानून असरदार साबित होंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सरकार के फैसलों से तय होंगे.

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