करीब तीन साल से जारी गाजा युद्ध के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके नेतृत्व में गठित "बोर्ड ऑफ पीस" (Board of Peace) की मध्यस्थता से हमास ने चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार छोड़ने के व्यापक रोडमैप पर सहमति जता दी है.

 यदि यह योजना लागू होती है तो इसके बदले इज़रायल अपनी सेना को धीरे-धीरे पूरी तरह गाजा से वापस बुलाएगा. हालांकि, यह समझौता अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है. 

हमास ने स्पष्ट किया है कि वह तभी हथियार छोड़ेगा जब इज़रायल तय समयसीमा के अनुसार सेना हटाने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी करेगा. दूसरी ओर, इजरायल ने भी इस प्रस्ताव पर औपचारिक मंजूरी नहीं दी है.

क्या है पूरा समझौता?

ट्रंप प्रशासन की 20-सूत्रीय शांति योजना के तहत गाजा में स्थायी युद्धविराम, हमास का निरस्त्रीकरण, इज़रायली सेना की वापसी, नई फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था और बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है. इस पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई गई है.

ये भी पढ़ें: इज़रायली सेना की चेतावनी: टायर शहर खाली करें, वरना जान का खतरा

हमास को क्या करना होगा?

प्रस्ताव के अनुसार हमास और अन्य सशस्त्र समूहों को:

  • भारी हथियार, रॉकेट और मिसाइलें सौंपनी होंगी.
  • हल्के हथियार भी चरणबद्ध तरीके से जमा कराने होंगे.
  • हथियार बनाने वाली इकाइयों को बंद करना होगा.
  • गाजा में बने सुरंग नेटवर्क को नष्ट करना होगा.
  • पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निगरानी में होगी.

इज़रायल को क्या करना होगा?

समझौते के बदले इज़रायल को भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे.

  • गाजा से चरणबद्ध तरीके से सेना हटानी होगी.
  • सैन्य अभियानों को समाप्त करना होगा.
  • मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी.
  • प्रत्येक चरण के सफल सत्यापन के बाद ही अगला चरण लागू होगा. 

गाजा का शासन कौन सँभालेगा?

योजना के अनुसार हमास धीरे-धीरे प्रशासनिक भूमिका से हटेगा और उसकी जगह एक तकनीकी फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक समिति काम सँभालेगी. सुरक्षा व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल और नई फ़िलिस्तीनी पुलिस व्यवस्था बनाई जाएगी.

पुनर्निर्माण पर भी बड़ा फोकस

युद्ध समाप्त होने की स्थिति में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता जुटाई जाएगी. इसमें घर, अस्पताल, स्कूल, सड़कें, बिजली और जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं के पुनर्निर्माण की योजना शामिल है.

बोर्ड ऑफ पीस का कहना है कि इसके लिए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा.

सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

हालांकि यह घोषणा ऐतिहासिक मानी जा रही है, लेकिन इसके सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं.

  • इज़रायल ने अभी तक औपचारिक स्वीकृति नहीं दी है.
  • हमास का कहना है कि सेना हटने से पहले वह पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ेगा.
  • दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास बना हुआ है.
  • युद्धविराम के उल्लंघन की आशंका लगातार बनी हुई है.
  • अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना आसान नहीं होगा.

क्या वास्तव में खत्म हो सकता है गाजा युद्ध?

यदि यह रोडमैप सफलतापूर्वक लागू हो जाता है तो यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा पश्चिम एशियाई शांति समझौता साबित हो सकता है. इससे गाजा में युद्ध समाप्त होने, हमास के सैन्य ढांचे के खत्म होने, नई प्रशासनिक व्यवस्था बनने और लाखों विस्थापित लोगों के पुनर्वास का रास्ता खुल सकता है.

लेकिन फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है. अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या हमास और इज़रायल दोनों अपनी-अपनी शर्तों और प्रतिबद्धताओं का पालन करते हैं. इसलिए इसे अभी शांति की गारंटी नहीं, बल्कि शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण लेकिन अनिश्चित कदम माना जा रहा है.

 

"करीब तीन साल से जारी गाजा युद्ध के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके नेतृ…"