अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस की तस्वीर बदल दी है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और सेनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है और रिपब्लिकन पार्टी से कांग्रेस का नियंत्रण छीन लिया है. रिपोर्टों के मुताबिक़ मतदाताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एजेंडे को नकार दिया है. यह नतीजा ट्रंप के बाक़ी कार्यकाल पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि अब क़ानून बनाने और नीतियां लागू करने के लिए उन्हें विपक्ष के नियंत्रण वाली कांग्रेस से निपटना होगा.
अमेरिका में हर दो साल पर संघीय चुनाव होते हैं और जो चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में पड़ता है, उसे मिडटर्म कहा जाता है.
इस बार मतदाताओं ने कांग्रेस के दोनों सदनों के लिए वोट डाले, और कई राज्यों में गवर्नर भी चुने गए.
बहुमत का गणित
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं: निचला सदन या हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और ऊपरी सदन सेनेट. प्रतिनिधि सभा में 435 सदस्य होते हैं और बहुमत के लिए किसी पार्टी को 218 सीटें चाहिए होती है. सभी सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है, इसलिए हर मिडटर्म में पूरा सदन नए सिरे से चुना जाता है. सेनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं, जिनका कार्यकाल छह साल का होता है. हर चुनाव में लगभग एक-तिहाई सीटें दांव पर होती हैं, इस बार 35 सीटें हैं. सेनेट में स्पष्ट बहुमत के लिए 51 सीटें चाहिए होती है. अगर दोनों पार्टियों के पास 50-50 सीटें हों, तो उपराष्ट्रपति के पास निर्णायक वोट देने का अधिकार होता है और उनकी पार्टी को सेनेट का नियंत्रण मिल जाता है.
कैसे होती है गिनती?
अमेरिका में चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी केंद्र की नहीं, बल्कि राज्यों और स्थानीय प्रशासन की होती है इसलिए हर राज्य के गिनती के नियम अलग हैं. इनमें तय होता है कि मतगणना में कौन शामिल हो सकता है, वोट किस क्रम में गिने जाएंगे और प्रक्रिया का कितना हिस्सा आम लोगों के लिए खुला रहेगा.
कुछ राज्यों, जैसे फ़्लोरिडा, में चुनाव के दिन से पहले ही शुरुआती और डाक से आए बैलेट की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. कुछ राज्य मतदान के दिन ही गिनती शुरू करते हैं. स्थानीय चुनाव अधिकारी हर वोट की जांच करते हैं, उसे प्रक्रिया से गुज़ारते हैं और फिर गिनते हैं. इस पूरी प्रक्रिया को कैनवसिंग कहा जाता है.
ज़्यादातर राज्यों में चुनाव के बाद ऑडिट भी ज़रूरी होता है, जिसमें मशीन से गिने गए वोटों का मिलान बैलेट की मैन्युअल गिनती से किया जाता है. आमतौर पर पूरी गिनती हाथ से तभी होती है, जब दोबारा गिनती की नौबत आती है.

X
House of Representative के नतीजे
मीडिया के अनुमान और आधिकारिक नतीजे में फ़र्क़
अंतिम नतीजा आने से पहले ही अमेरिकी मीडिया संस्थान कई सीटों पर जीत का अनुमान जारी कर देते हैं. इसके लिए वो अब तक की गिनती का इस्तेमाल करते हैं. जब उन्हें लगता है कि किसी उम्मीदवार की बढ़त इतनी बड़ी है कि बाक़ी वोटों से उसे पलटना संभव नहीं, तब वो नतीजे का एलान कर देते हैं. यह आधिकारिक नतीजा नहीं होता, बल्कि मीडिया का आकलन होता है.
शुरुआती नतीजों से पूरी तस्वीर साफ़ नहीं होती, क्योंकि वो अक्सर उन राज्यों से आते हैं जहां किसी एक पार्टी की जीत लगभग तय मानी जाती है. असली संकेत कड़े मुक़ाबले वाली सीटों से मिलते हैं. जहां फ़ासला बहुत कम होता है, वहां मीडिया संस्थान भी अनुमान जारी करने में सावधानी बरतते हैं और इसमें काफ़ी वक़्त लग सकता है.
देरी की वजहें
जिन सीटों पर मुक़ाबला बेहद क़रीबी होता है, वहां नतीजे में सबसे ज़्यादा देर लगती है. ऐसी सीटों पर दोबारा गिनती और क़ानूनी चुनौतियों की संभावना भी रहती है. डाक से आए बैलेट की गिनती भी धीमी होती है, क्योंकि अधिकारियों को लिफ़ाफ़ों की जांच करनी होती है और उन पर मौजूद हस्ताक्षरों को मैच करना होता है.
राज्यों के नियम इसमें और फ़र्क़ डालते हैं. अमेरिका के 30 से ज़्यादा राज्यों में चुनाव के दिन से पहले ही बैलेट की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति है, पर कुछ राज्यों में ऐसा नहीं होता. कैलिफ़ोर्निया में डाक से भेजे गए बैलेट पर चुनाव के दिन तक की मुहर होनी चाहिए, और चुनाव के सात दिन के भीतर पहुंचने वाले ऐसे बैलेट भी गिने जाते हैं.
अलास्का में Ranked Choice वोटिंग की वजह से गिनती में बाक़ी राज्यों से ज़्यादा वक़्त लग सकता है. इस बार वहां की सेनेट सीट के लिए अतिरिक्त राउंड की गिनती 18 नवंबर को होने की बात कही गई है.
जब सभी वोट जुड़ जाते हैं और दोबारा गिनती जैसी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तब नतीजे आधिकारिक रूप से प्रमाणित किए जाते हैं. यह काम पहले स्थानीय और काउंटी स्तर पर होता है और फिर पूरे राज्य में. इसके बाद आमतौर पर राज्य के गवर्नर जीते हुए सदस्यों के प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करते हैं, जो कांग्रेस को भेजे जाते हैं.
कड़े मुक़ाबले में हारने वाला उम्मीदवार दोबारा गिनती की मांग कर सकता है. कुछ राज्यों में जीत का अंतर तय सीमा के भीतर रहे, तो दोबारा गिनती अपने आप शुरू हो जाती है. उम्मीदवार गड़बड़ी का आरोप लगाकर अदालत भी जा सकते हैं. सदस्यों को अंतिम रूप से स्वीकार करने का अधिकार कांग्रेस के हर सदन के पास है. सैद्धांतिक रूप से कोई सदन किसी निर्वाचित व्यक्ति को सदस्य मानने से इनकार कर सकता है या जांच का आदेश दे सकता है.
पिछली बार कितना वक़्त लगा था
इतिहास बताता है कि इंतज़ार लंबा हो सकता है. 2022 के मिडटर्म में चुनाव के एक हफ़्ते बाद तक कांग्रेस पर नियंत्रण की तस्वीर साफ़ नहीं थी. नेवादा की अहम सेनेट सीट की गिनती पूरी होने में चार दिन लगे, और उस जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 50 सीटें हो गईं. तब उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के निर्णायक वोट की वजह से सेनेट पर उसका नियंत्रण तय हो गया. जॉर्जिया में किसी उम्मीदवार को 50 फ़ीसदी से ज़्यादा वोट नहीं मिले थे, इसलिए वहां दिसंबर में दोबारा चुनाव कराना पड़ा. प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत 17 नवंबर के आसपास पक्का माना गया. 2024 में भी प्रतिनिधि सभा का नियंत्रण तय होने में आठ दिन लगे थे.
कांग्रेस पर किसका नियंत्रण?
गिनती के बाद के ताज़ा आकलनों के मुताबिक़ डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए ज़रूरी 218 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है. सेनेट में भी उसने बहुमत हासिल कर लिया है, जहां नियंत्रण के लिए 51 सीटें चाहिए. इसका मतलब है कि क़ानून बनाने की प्रक्रिया के दोनों सदनों पर अब विपक्षी पार्टी का नियंत्रण होगा. रिपब्लिकन पार्टी, जिसके पास अब तक दोनों सदनों में बढ़त थी, इस बार दोनों जगह पिछड़ गई. सेनेट में इसका असर राष्ट्रपति की नियुक्तियों की मंज़ूरी पर भी पड़ेगा, क्योंकि यह काम सेनेट के ज़िम्मे होता है.
ये भी पढ़ें: अमेरिकी Mid-Term चुनाव का क्या होगा भारत पर असर?
"अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस की तस्वीर बदल दी है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और सेनेट, दोनों में बह…"













