ईरान में जारी सैन्य तनाव के बीच अब जलापूर्ति का संकट भी गहराता दिखाई दे रहा है. भीषण गर्मी के दौर से गुजर रहे देश में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. ऐसे में अमेरिकी हवाई हमलों के बाद हजारों लोगों के सामने पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है.
होर्मोज़गन प्रांत में जलापूर्ति प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के होर्मोज़गन प्रांत में हुए अमेरिकी हमलों के कारण करीब 20,000 लोग स्वच्छ पेयजल से वंचित हो गए हैं. हमलों का असर सिरिक काउंटी के कुहेस्त़ाक शहर और बेमानी जिले के 10 गांवों पर पड़ा है.
होर्मोज़गन वॉटर एंड वेस्ट वॉटर कंपनी के प्रबंध निदेशक अब्दोलहामिद हमज़ेहपौर ने बताया कि 500 और 2,000 घन मीटर क्षमता वाले दो कंक्रीट जलाशय तथा उनसे जुड़ी मशीनरी नष्ट हो गई है. फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल वॉटर टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे की बहाली में समय लग सकता है.
किन क्षेत्रों को बनाया गया निशाना
अमेरिका ने अपने हवाई अभियान के दौरान होर्मोज़गन और सिरीक क्षेत्र के अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित जास्क और केशम द्वीपों को भी निशाना बनाया. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई उसके अपाचे हेलिकॉप्टर को कथित रूप से मार गिराए जाने के जवाब में की गई.
वॉशिंगटन का दावा है कि हमलों का लक्ष्य हवाई रक्षा प्रणालियां, रडार प्रतिष्ठान और अन्य सैन्य ढांचे थे. वहीं ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि सिरीक क्षेत्र में नागरिक जल सुविधाओं को सीधे निशाना बनाया गया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ ड्रोन और मिसाइल हमलों की नई श्रृंखला शुरू कर दी है.
ईरानी मीडिया के अनुसार, आईआरज़ीसी ने अपने जवाबी अभियान के तहत अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े को भी निशाना बनाया. इसके अलावा ईरानी सशस्त्र बलों ने बुधवार तड़के जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए.
"ईरान में जारी सैन्य तनाव के बीच अब जलापूर्ति का संकट भी गहराता दिखाई दे रहा है. भीषण गर्मी के दौर से गुजर रहे देश में तापमान 45 से 50 डिग्री…"
