टीएमसी की मुश्किलें किसी भी तरफ से कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. तीन राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा, 64 विधायकों की बगावत और 20 लोकसभा सांसदों की नाराजगी के बाद अब एक ऐसा नाम सामने आया है जिसने ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. वह नाम है कल्याण बनर्जी का.
जो नेता हमेशा ममता के साथ मजबूती से खड़े रहे, पार्टी का पक्ष अदालत में रखते रहे, आज उन्होंने खुलकर कहा कि ममता दीदी को तय करना होगा कि पार्टी में अभिषेक रहेंगे या मैं.
कल्याण बनर्जी कोई साधारण नेता नहीं
कल्याण बनर्जी टीएमसी के उन नेताओं में हैं जो पार्टी की स्थापना के समय से साथ हैं. श्रीरामपुर से चार बार के सांसद हैं. 2009 से लेकर आज तक लगातार लोकसभा में हैं. इससे पहले 2001 से 2006 तक विधानसभा के सदस्य भी रहे. पेशे से अधिवक्ता हैं और 45 साल का वकालत का अनुभव है. पार्टी की तरफ से अदालत में पैरवी करना उनका काम रहा है.
यही नहीं कल्याण बनर्जी अपनी बेबाकी के लिए भी जाने जाते हैं. संसद परिसर के बाहर उन्होंने तत्कालीन उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ की नकल उतारी थी. 2024 में जब भाजपा 400 पार का नारा लगा रही थी तो जब बीजेपी बहुमत तक भी नहीं पहुंच पाई तो उन्होंने संसद में कित-कित कर बीजेपी पर तंज कसा था.
और जब 2026 में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था तो सदन कि में खड़े होकर कहा था कि बाहर आप डार्लिंग कहते हैं और यहां बोलने नहीं देते (जगदंबिका पाल उस वक्त सदन की कार्यवाही चला रहे थे). यह वही नेता हैं जो हमेशा ममता के लिए आगे आए. और आज उन्होंने ममता के सामने ही सवाल खड़ा कर दिया.
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मामला क्या है जिसने यह विवाद छेड़ा
कुछ दिनों पहले जब टीएमसी विधायकों ने बगावत की तो एक मामला सामने आया. टीएमसी के दो विधायकों ऋतब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने शिकायत की कि विपक्ष के नेता पद के लिए शोभनदेब चट्टोपाध्याय के समर्थन में जो पत्र भेजा गया उसमें उनके हस्ताक्षर जाली हैं.
इसके बाद एफआईआर दर्ज हुई और CID ने मामला अपने हाथ में लिया. सीआईडी ने 13 विधायकों के बयान दर्ज किए जिनमें से तीन विधायकों बहारुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभाशिस दास ने भी दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार कर दिया. इस पूरे मामले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को भी नोटिस दिया था लेकिन वह पेश नहीं हुए और उन्होंने इस नोटिस को अदालत में चुनौती दे दी.
पार्टी की तरफ से इस मामले के वकील कल्याण बनर्जी थे. लेकिन अभिषेक बनर्जी ने उन्हें वकील पद से हटा दिया और आर्यन भट्टाचार्य को यह जिम्मेदारी दे दी. इसी फैसले के बाद कल्याण बनर्जी भड़क गए.
कल्याण बनर्जी का सीधा हमला
मीडिया के सामने आकर कल्याण बनर्जी ने कहा कि मुझे कूड़ेदान की तरह मत समझो. मुझे बता दो कि मैं इस मामले में पेश होऊंगा या नहीं. बाद में बताया गया कि आर्यन भट्टाचार्य केस लड़ेंगे और मुझे अलग कर दिया गया. मेरा 45 साल का वकालत का अनुभव है.
अभिषेक बनर्जी पर सीधा निशाना साधते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि अभिषेक एक घमंडी आदमी हैं. उनके इस रवैये की वजह से मेरे लिए पार्टी में काम करना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि अभिषेक की वजह से हमें चोर-चोर सुनना पड़ रहा है. हमारी जान को खतरा है. पार्टी बुरे दौर से गुजर रही है. मैं दीदी के साथ हूं लेकिन ममता बनर्जी को फैसला करना होगा कि पार्टी में अभिषेक रहेंगे या हम जैसे लोग.
टीएमसी के सामने असली सवाल
एक तरफ तीन राज्यसभा सांसद जा चुके हैं और तीन और जाने वाले हैं. 64 विधायक बगावत कर चुके हैं. लोकसभा में 20 सांसद नाराज हैं. और अब ममता के सबसे पुराने और भरोसेमंद साथियों में से एक कल्याण बनर्जी ने खुलकर अभिषेक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
यह पूरी बगावत मूल रूप से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ही है और अब वह नेता भी यही कह रहे हैं जो कभी ममता के सबसे करीबी माने जाते थे. सवाल ये है कि क्या इस बयान के बाद क्या कल्याण बनर्जी TMC में बने रहेंगे या फिर बगावत सांसदो की सुची में एक और नाम जुड़ जायेगा.
"टीएमसी की मुश्किलें किसी भी तरफ से कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. तीन राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा, 64 विधायकों की बगावत और 20 लोकसभा सांसदो…"
