4 मई को बंगाल विधानसभा के नतीजे आए थे. उस दिन से अब तक टीएमसी की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. जो बगावत विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता चुनने से शुरू हुई थी वह लोकसभा होते-होते अब राज्यसभा तक पहुंच गई है. चार दिनों के भीतर तीन राज्यसभा सांसद पार्टी और सदन दोनों से इस्तीफा दे चुके हैं.
सुखेंदु, सुष्मिता और अब प्रकाश
सबसे पहले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा दिया. उन्होंने कहा कि पार्टी से नाराजगी काफी लंबे समय से चल रही थी. इसके बाद 10 जून को ममता की करीबी मानी जाने वाली नेता सुष्मिता देव ने राज्यसभा और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे से पहले उनकी मुलाकात असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से हुई थी.
सुष्मिता देव की कहानी दिलचस्प है. वह पहले कांग्रेस की नेता थीं. 2019 में लोकसभा चुनाव हार जाने के बाद उन्हें पार्टी में अपना भविष्य नहीं दिखा और 2021 में वह टीएमसी में आ गईं. ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजा और वह पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनीं. कुछ दिन पहले तक वह टीवी पर बागी नेताओं को खरी-खोटी सुना रही थीं. लेकिन एकाएक हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात हुई और उन्होंने इस्तीफा दे दिया. जाते-जाते उन्होंने कहा कि यह उनका निजी फैसला है और ममता बनर्जी पर कोई टिप्पणी नहीं की.
अब तीसरा नाम आया है प्रकाश चिक बराइक का. उन्होंने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया. अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि राज्यसभा में रहते हुए जो सहयोग और सहायता मिली उसके लिए आभारी हैं और अब इस्तीफा दे रहे हैं.
मीडिया के सवालों पर उन्होंने साफ कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी को जनादेश नहीं मिला. उनके निर्वाचन क्षेत्र में टीएमसी एक भी सीट नहीं जीत पाई. जनादेश भाजपा के पक्ष में है और उसका सम्मान करते हुए उन्होंने यह फैसला लिया. आगे क्या करेंगे इस सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति में उनका भविष्य है और समय बताएगा.
अभिषेक के करीबी थे प्रकाश चिक
प्रकाश चिक बराइक का इस्तीफा इसलिए और बड़ा झटका है क्योंकि वह अभिषेक बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में से एक माने जाते थे. और यह TMC में पूरी बगावत मूल रूप से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ही है. 43 साल के प्रकाश चिक एक युवा आदिवासी चेहरा हैं. उन्होंने 2004 में सिलीगुड़ी के सूर्य सेन कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया.
राजनीति में आने से पहले चाय बागान में काम करते थे और मौसमी फसलों का रिसेल भी करते थे. वहीं से चाय बागान कर्मचारियों के मजबूत नेता के रूप में उनकी पहचान बनी. 2021 में जब टीएमसी अलीपुरद्वार जिले में सभी सीटें हार गई थी तब उन्हें जिला अध्यक्ष बनाया गया. 2023 में पार्टी ने उन्हें निर्विरोध राज्यसभा भेजा. और अब वही नेता पार्टी छोड़ रहे हैं.
80 में से 64 विधायक, 28 में से 20 सांसद बागी
आंकड़े बताते हैं कि टीएमसी किस हद तक खोखली हो चुकी है. विधानसभा में 80 विधायकों में से पहले 58 फिर 60 और अब सूत्रों के मुताबिक 64 विधायक बगावत कर चुके हैं. लोकसभा में 28 सांसदों में से करीब 20 सांसद पार्टी से नाराज हैं और अलग गुट बनाकर एनडीए का समर्थन करना चाहते हैं.
इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखकर अपनी बैठने की जगह बदलने की मांग भी की है. राज्यसभा में 13 सांसदों में से तीन जा चुके हैं और सूत्रों की मानें तो आने वाले हफ्ते में तीन और इस्तीफा दे सकते हैं. तब राज्यसभा में टीएमसी के पास केवल सात सांसद बचेंगे.
ममता दिल्ली में, पार्टी बंगाल में बिखर रही है
इस सबके बीच ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में डेरा लगाए हुए हैं. वह कांग्रेस के बड़े नेताओं से लगातार बैठकें कर रहे हैं. सूत्रों के हवाले से यह खबर भी चल रही है कि टीएमसी का विलय कांग्रेस में हो सकता है. लेकिन जब तक यह फैसला होगा तब तक पार्टी के कितने नेता बचेंगे यह बड़ा सवाल है.
जो टीएमसी इतने साल तक बंगाल की राजनीति की धुरी रही वह आज पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है. महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ जो हुआ था वही कहानी अब बंगाल में लिखी जा रही है.
"4 मई को बंगाल विधानसभा के नतीजे आए थे. उस दिन से अब तक टीएमसी की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. जो बगावत विधानसभा में प्रतिपक्ष के ने…"
