अगर कोई कहे कि दो भाइयों ने पूरी दुनिया के चाँदी बाजार पर कब्जा करने की कोशिश की थी, तो शायद यह कहानी किसी फिल्म की लगे. लेकिन यह हकीकत है. 27 मार्च 1980 को दुनिया ने एक ऐसी घटना देखी जिसे आज भी सिल्वर थ्रस्डे (Silver Thursday) के नाम से याद किया जाता है. यह वह दिन था जब चाँदी की कीमतों में ऐसी गिरावट आई कि अरबों डॉलर की संपत्ति कुछ घंटों में मिट गई और वैश्विक कमोडिटी बाजार हमेशा के लिए बदल गया.इतिहास के पन्नों से

द न्यूयार्क टाइम्स

कैसे शुरू हुई यह कहानी?

1970 के दशक के अंत में अमेरिका के टेक्सॉस के अरबपति हंट ब्रदर्स  नेल्सन बंकर हंट और विलियम हर्बर्ट हंट को डर था कि बढ़ती महंगाई और डॉलर की कमजोरी उनकी संपत्ति का मूल्य घटा सकती है. इसलिए उन्होंने सोने के साथ-साथ चाँदी में बड़े पैमाने पर निवेश करना शुरू किया.

धीरे-धीरे उन्होंने केवल चाँदी खरीदना ही नहीं, बल्कि फ्य़ूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए भी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली. माना जाता है कि उनके नियंत्रण में लगभग 20 करोड़ औंस (200 मिलियन औंस) चाँदी आ गई थी. उस समय यह दुनिया की उपलब्ध चाँदी का बहुत बड़ा लगभग एक तिहाई हिस्सा था.

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6 डॉलर से 50 डॉलर तक पहुंची चाँदी

जनवरी 1979 में चाँदी की कीमत लगभग 6 डॉलर प्रति औंस थी. लेकिन हंट ब्रदर्स की लगातार खरीदारी और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण केवल एक साल में इसकी कीमत बढ़कर लगभग 50 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई.

यानी चाँदी ने करीब 700% की ऐतिहासिक तेज़ी दिखाई. पूरी दुनिया के निवेशक इस तेजी में शामिल होने लगे और बाजार में एक तरह का बुलबुला बन गया.

कॉमेक्स की एंट्री और हंटर ब्रदर्स बने कंगालपति

जब कीमतें असामान्य रूप से बढ़ने लगीं, तो अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX और नियामकों ने हस्तक्षेप किया. उन्होंने फ्यूचर्स ट्रेडिंग के नियम कड़े कर दिए. मार्जिन बढ़ा दिया गया और नई खरीद पर कई प्रतिबंध लगा दिए गए.

इसका सीधा असर हंट ब्रदर्स पर पड़ा. उन्हें अपनी बड़ी पोजिशन बनाए रखने के लिए भारी रकम जमा करनी थी, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके. जिसके कारण से बाजार में संकट उत्पन्न हो गया.

27 मार्च 1980: Silver Thursday

फिर आया 27 मार्च 1980, जिसे इतिहास में सिल्वर थ्रस्डे  (Silver Thursday) कहा जाता है।

जैसे ही बाजार खुला, चाँदी की कीमतों में तेज गिरावट शुरू हो गई. कुछ ही समय पहले लगभग 50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची चाँदी गिरकर लगभग 10 -11 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई.

यह गिरावट केवल कीमतों की नहीं थी. इससे निवेशकों का भरोसा भी टूट गया. कई ट्रेडिंग फर्मों को भारी नुकसान हुआ और अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया. हंट ब्रदर्स अरबों डॉलर के कर्ज में फंस गए और बाद में उन्हें कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा.

2026 में फिर क्यों हो रही है चर्चा?

साल 2026 में चाँदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद तेज करेक्शन देखा है. हालांकि कई निवेशक इसकी तुलना सिल्वर थ्रस्डे से कर रहे हैं, लेकिन दोनों स्थितियों में बड़ा अंतर है.

1980 में कीमतें कुछ बड़े खिलाड़ियों की खरीदारी और बाजार पर नियंत्रण की कोशिश से बढ़ी थीं. जबकि 2026 में कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरें, डॉलर की चाल, औद्योगिक मांग, ETF निवेश और मुनाफावसूली रहे हैं. बाजार पहले की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी और नियामकीय निगरानी में है.

आज, 46 साल बाद भी, 27 मार्च 1980 निवेशकों को यही याद दिलाता है कि बाजार में लालच जितनी तेज़ी से कीमतों को ऊपर ले जाता है, उतनी ही तेज़ी से उन्हें नीचे भी ला सकता है.

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