भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक साथ कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. केंद्रीय बैंक ने विभिन्न नियामकीय नियमों के उल्लंघन पर चार सहकारी बैंकों पर आर्थिक दंड लगाया है. वहीं, तीन सहकारी बैंकों पर पहले से लागू प्रतिबंधों (डायरेक्शन्स) की अवधि भी तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई है.

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय और वैधानिक नियमों के पालन में पाई गई कमियों के आधार पर की गई है. इसका ग्राहकों की जमा राशि अथवा बैंक द्वारा किए गए किसी भी लेनदेन की वैधता से कोई संबंध नहीं है.

इन बैंकों पर लगाया गया जुर्माना

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धर्मवीर संभाजी अर्बन सहकारी बैंक, पुणे

आरबीआई ने 29 जून 2026 के आदेश के तहत बैंक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया.

जांच में पाया गया कि बैंक ने ग्राहकों के केवाईसी (अपने ग्राहक को जानिए) संबंधी अभिलेख निर्धारित समय सीमा के भीतर केंद्रीय केवाईसी अभिलेखागार (सीकेवाईसीआर) पर अपलोड नहीं किए. यह आरबीआई के केवाईसी संबंधी निर्देशों का उल्लंघन माना गया.

एन.ई. एवं ई.सी. रेलवे कर्मचारी बहुराज्यीय प्राथमिक सहकारी बैंक, गोरखपुर

30 जून 2026 को आरबीआई ने इस बैंक पर 1 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया.

निरीक्षण में दो प्रमुख अनियमितताएं सामने आईं-

  • पात्र निष्क्रिय जमा राशि को निर्धारित समय के भीतर जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष (डीईएएफ) में जमा नहीं किया गया.
  • बैंक ने सभी आवश्यक क्रेडिट सूचना कंपनियों की सदस्यता नहीं ली तथा अपने ऋणग्राहकों की जानकारी सभी निर्धारित संस्थाओं को उपलब्ध नहीं कराई.

निर्मल अर्बन सहकारी बैंक, नागपुर

आरबीआई ने इस बैंक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.

निरीक्षण में पाया गया कि बैंक ने पर्यवेक्षी कार्यवाही रूपरेखा (सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क) के तहत जारी निर्देशों का पालन नहीं किया. बैंक ने कुछ मामलों में एकल ऋणग्राही को दिए जाने वाले ऋण की सीमा निर्धारित नियमों के अनुसार कम नहीं की तथा कुछ सावधि जमा योजनाओं पर भारतीय स्टेट बैंक से अधिक ब्याज दर की पेशकश की.

किन बैंकों पर बढ़ाया गया प्रतिबंध?

आर्थिक दंड के साथ-साथ आरबीआई ने तीन सहकारी बैंकों पर पहले से लागू प्रतिबंधों की अवधि भी बढ़ा दी है.

बघाट अर्बन सहकारी बैंक, सोलन (हिमाचल प्रदेश)

इस बैंक पर लागू प्रतिबंध 8 जुलाई 2026 से 8 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिए गए हैं.

इनोवेटिव सहकारी अर्बन बैंक, नई दिल्ली

इस बैंक पर लागू प्रतिबंध 4 जुलाई 2026 से 4 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे.

रामगढ़िया सहकारी बैंक, नई दिल्ली

इस बैंक पर लागू प्रतिबंधों की अवधि भी 8 जुलाई 2026 से 8 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है.

इन प्रतिबंधों का अर्थ क्या है?

आरबीआई द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के दौरान संबंधित बैंक-

  • आरबीआई की पूर्व अनुमति के बिना नए ऋण स्वीकृत नहीं कर सकते.
  • नई वित्तीय देनदारियां स्वीकार नहीं कर सकते.
  • बड़े निवेश, संपत्तियों की बिक्री अथवा हस्तांतरण जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय स्वतंत्र रूप से नहीं ले सकते.
  • बैंक के संचालन पर आरबीआई की विशेष निगरानी बनी रहती है.

आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों की अवधि बढ़ाने का अर्थ यह नहीं है कि बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है. साथ ही, यह भी नहीं माना जाना चाहिए कि केंद्रीय बैंक संबंधित बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है.

ग्राहकों पर क्या होगा प्रभाव?

आरबीआई के अनुसार इन कार्रवाइयों का ग्राहकों की जमा राशि या बैंकिंग सेवाओं पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा. यह कार्रवाई केवल बैंक प्रबंधन द्वारा नियामकीय नियमों के पालन में हुई कमियों के कारण की गई है. यदि भविष्य में निकासी या अन्य बैंकिंग सेवाओं पर कोई विशेष सीमा लगाई जाती है, तो उसकी अलग से घोषणा की जाएगी.

क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?

आरबीआई पिछले कुछ वर्षों से सहकारी बैंकों की निगरानी लगातार सख्त कर रहा है. केवाईसी, ऋण वितरण, जोखिम प्रबंधन, क्रेडिट सूचना साझा करने तथा अन्य नियामकीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार निरीक्षण कर रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से सहकारी बैंक अधिक पारदर्शी बनेंगे, नियमों का बेहतर पालन करेंगे और जमाकर्ताओं का विश्वास भी मजबूत होगा.

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