भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के मौद्रिक नीति समिति (मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी) की 61वीं बैठक 3 से 5 जून तक आयोजित की गई. इस बैठक की अध्यक्षता रिज़र्व बैंक के गवर्नर श्री संजय मल्होत्रा ने की. बैठक में इसके सदस्य डॉ.नागेश कुमार,श्री सौगता भट्टाचार्य, प्रो.राम सिंह,डॉ.पूनम गुप्ता और श्री इंद्रनील भट्टाचार्य उपस्थित रहे।वैश्विक और घरेलू दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए एमपीसी कमेटी ने रेपो दर को अपरिवर्तित रखते हुए 5.25 प्रतिशत ही रखा है.
क्या होता है रेपो दर ?
रेपो दर वह दर होता है जिस पर केंद्रीय बैंक (आरबीआई) सरकारी एवं निजी बैंकों को ऋण प्रदान करता है. इस दर के बढ़ जाने से आम जनता पर सीधा पड़ता है . उनके लिए भी ऋण लेना मंहगा हो जाता है एवं इस दर में कटौती से आम जनता को सस्ते दर पर ऋण के साथ-साथ मंहगाई से भी राहत मिलती है.
क्या क्या रहेगा अपरिवर्तित
रिज़र्व बैंक की एमपीसी कमेटी ने यह निर्णय लिया है कि इस बार भी रेपो दर 5.25 प्रतिशत के साथ-साथ, स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ़) की दर 5.00 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ़) की दर 5.5 प्रतिशत यथावत् रहेगी.
मंहगाई का होगा असर
जनवरी के तुलना में अप्रैल माह में खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि में 0.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति की दर 2.76 प्रतिशत थी एवं अप्रैल में यह आकड़े बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई है. रिज़र्व बैंक का कहना है कि तीसरे और चौथे तिमाही में यह दर बढ़कर 5.9 प्रतिशत, 5.4 प्रतिशत क्रमशः रह सकते है. वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए औसत खुदरा मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
आम आदमी पर क्या होगा इसका प्रभाव
खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा. आगे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण खाद्य वस्तुएं और भी मंहगी होंगी. सिर्फ मई महीने में ही पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में 7.4 प्रतिशत और 8.4 प्रतिशत क्रमशः बढ़े हैं. शहरी लोगों की अपेक्षा ग्रामीण जीवन पर इसका असर अधिक पड़ेगा. जनवरी से अप्रैल तक के आकड़े बताते है कि शहरी व्यक्ति की तुलना में ग्रामीण जनता को मंहगाई की मार अधिक पड़ेगी. रेपो दर समान रहने से आम जन मानस की ईएमआई यथावत् रहेंगी. बचत करने वाले व्यक्तियों को समान दर ही ब्याज मिलेगा.
वास्तविक जीडीपी का अनुमान
रिज़र्व बैंक ने 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जिसमें पहली तिमाही में 6.6 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है. रिज़र्व बैंक का यह कहना है कि वैश्विक तनाव के बढ़ते समस्या से अर्थव्यवस्था में वृद्धि के आकड़े को प्राप्त करना एक चुनौतीपूर्ण एवं साहसिक प्रयास है.
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