दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में कुछ बड़े खुलासे सामने आए हैं. इस हादसे में कुल दस लोगों की मौत हुई थी, जिनमें आठ लोगों की मौत मौके पर ही हो गई थी और दो लोगों की मौत इलाज के दौरान हुई. हरिद्वार से इंदौर जा रही एक निजी स्लीपर बस बुधवार यानी की 1 जुलाई को सुबह 2-3 बजे एक ट्रेलर से टकराई और फिर अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी, जहां कुछ समय बाद बस के पीछे के हिस्से में भीषण आग लग गई.
मौजूदा लोगों के अनुसार, अधिकांश यात्री इस हादसे के समय गहरी नींद में थे. जब बस की टक्कर ट्रेलर से हुई तब ऊपरी बर्थ पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े और करीब 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और 8 लोगों ने इस हादसे में अपनी जान गंवा दी.
इस हादसे की जांच के लिए जिला प्रशासन ने आठ सदस्यीय जांच समिति गठित की थी. इस कमेटी की रिपोर्ट में चौकने वाली बातें सामने आई हैं.
साइन बोर्ड ने ले ली जान?
जिला कलेक्टर सौम्या झा ने बताया कि घटना की जांच के लिए गठित कमेटी ने मौके का निरीक्षण, राहगीरों और ट्रेलर चालक के बयान और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पाया कि एक्सप्रेसवे पर लगे साइन बोर्ड स्पष्ट नहीं थे, जो हादसे का मुख्य कारण हो सकता है. साइन बोर्ड पर दिशा बताने वाले ऐरो नहीं हैं, जिससे अजमेर और जयपुर की ओर जाने वाले वाहन चालक भ्रमित होकर अचानक गति कम कर देते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना और बढ़ जाती है.
जिला कलेक्टर ने बताया कि अब राज्य स्तर पर सभी प्रमुख हाईवे पर साइन बोर्डों में आवश्यक सुधार किए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके.
दमकल की देरी या बस की सुरक्षा संबंधी खामी?
हादसे के दौरान राहत बचाव कार्य में दमकल की देरी भी जांच का अहम मुद्दा रही. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और एम्बुलेंस कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई थीं, लेकिन फायर ब्रिगेड को पहुंचने में करीब आधा घंटा लग गया. इसके मद्देनज़र भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से बड़े हाईवे पर स्थायी फायर टेंडर की व्यवस्था सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है.
जांच में बस की कुछ सुरक्षा संबंधी खामी भी सामने आई है. जिसमे पाया गया कि बस में कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं था. वहीं, लंबी ड्राइविंग के कारण थकान, अवैध पार्किंग, हाईवे पर आवारा पशुओं की मौजूदगी जैसे मुद्दों को भी दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है और बस में आग लगने के दौरान सिगरेट की भूमिका भी जांच का विषय है.
आर्थिक सुविधा का भेजा प्रस्ताव
जिला कलेक्टर के अनुसार, पीड़ित परिवारों को आर्थिक सुविधा देने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज दिए गए हैं. साथ ही जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो हाईवे पर नियमित जांच अभियान चलाकर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगी.
यह हादसा राजस्थान के दौसा के पास दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस हाईवे पर कोलवा थाना क्षेत्र स्थित रेस्ट एरिया के पास हुआ था.
यह भी पढ़ें- Shirley Setia Birthday: पजामा पहन कर गाया गाना और बन गईं Gen-Z की Crush, कौन हैं ये सिंगर?
"दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में कुछ बड़े खुलासे सामने आए हैं. इस हादसे में कुल दस लोगों की मौत हुई थी, जिनमें आठ लोगो…"
