करीब पांच साल पहले जिस OYO को भारी घाटे, कर्मचारियों की छंटनी और लगातार टलते IPO के लिए जाना जा रहा था, वही कंपनी अब एक बार फिर शेयर बाजार का दरवाजा खटखटा रही है. OYO की पैरेंट कंपनी PRISM (पूर्व नाम Oravel Stays) ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ₹6,650 करोड़ के IPO के लिए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) दाखिल कर दिया है. यह कंपनी का शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का सबसे मजबूत प्रयास माना जा रहा है.

OYO की शुरुआत कैसे हुई?

OYO की स्थापना वर्ष 2012 में रितेश अग्रवाल ने की थी. शुरुआत बजट होटलों के एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म के रूप में हुई, लेकिन कुछ ही वर्षों में कंपनी भारत से निकलकर एशिया, यूरोप, अमेरिका और मध्य-पूर्व तक पहुंच गई.

कोविड-19 महामारी के दौरान होटल उद्योग को भारी झटका लगा और OYO भी इससे अछूता नहीं रहा. कंपनी ने हजारों कर्मचारियों की छंटनी की, कई देशों में कारोबार समेटा और लागत घटाने पर फोकस किया. पिछले दो वर्षों में OYO ने लाभप्रदता और नकदी प्रवाह सुधारने की दिशा में काम किया है.

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भारत के सबसे चर्चित स्टार्टअप की शेयर बाजार में नई दस्तक

इस IPO की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कोई Offer for Sale (OFS) नहीं होगा.

यानी कंपनी के मौजूदा निवेशक अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं। पूरा ₹6,650 करोड़ फ्रेश इश्यू के जरिए जुटाया जाएगा. इसका मतलब है कि IPO से आने वाला पैसा सीधे कंपनी के पास जाएगा, न कि प्रमोटरों या शुरुआती निवेशकों के पास.

जुटाए गए पैसे का क्या करेगी OYO?

कंपनी के दस्तावेजों के अनुसार, IPO से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा कर्ज कम करने में इस्तेमाल किया जाएगा. लगभग ₹4,987.5 करोड़ कंपनी की सहयोगी इकाइयों के ऋण चुकाने में लगाए जाने की योजना है. इससे ब्याज का बोझ घटेगा और बैलेंस शीट मजबूत होगी. शेष राशि सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों और विस्तार योजनाओं पर खर्च की जा सकती है.

वित्तीय प्रदर्शन में बड़ा बदलाव

कुछ साल पहले तक लगातार घाटे में रहने वाली OYO अब मुनाफे की राह पर लौटती दिखाई दे रही है.

  • FY26 के पहले नौ महीनों (दिसंबर 2025 तक) में कंपनी ने ₹748 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया.
  • इसी अवधि में EBITDA भी मजबूत रहा.
  • कंपनी की आय में अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों का योगदान तेज़ी से बढ़ा है.

यही सुधार OYO के IPO को पिछले प्रयासों की तुलना में अधिक मजबूत बनाता है.

पहले क्यों टल गया था IPO?

OYO ने 2021 में भी IPO लाने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, स्टार्टअप वैल्यूएशन में गिरावट और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर सवालों के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बाद कंपनी ने रणनीति बदली, खर्च कम किए और मुनाफे पर ध्यान केंद्रित किया.

निवेशकों के लिए अवसर

  • भारत की सबसे बड़ी हॉस्पिटैलिटी टेक कंपनियों में से एक.
  • कंपनी अब घाटे से निकलकर मुनाफे में पहुंची है.
  • कर्ज कम होने से भविष्य में वित्तीय स्थिति और मजबूत हो सकती है.
  • वैश्विक होटल और ट्रैवल कारोबार में मौजूदगी से विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं.

लेकिन जोखिम भी कम नहीं

हालांकि निवेशकों को कुछ जोखिमों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए-

  • होटल उद्योग आर्थिक मंदी और पर्यटन पर काफी निर्भर करता है.
  • कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा अब विदेशी बाजारों से आता है, इसलिए वैश्विक परिस्थितियों का असर पड़ सकता है.
  • पिछले वर्षों में OYO का वैल्यूएशन काफी घट चुका है, जिससे बाजार की अपेक्षाएं बदली हैं.
  • IPO का अंतिम मूल्यांकन और प्राइस बैंड अभी घोषित नहीं हुआ है.

रितेश अग्रवाल की OYO ने घाटे से मुनाफे तक का लंबा सफर तय किया है. अब कंपनी ₹6,650 करोड़ के IPO के जरिए सार्वजनिक बाजार से पूंजी जुटाने की तैयारी में है. यह IPO केवल OYO के लिए नहीं, बल्कि भारत के स्टार्टअप सेक्टर के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि क्या इस बार निवेशक OYO की नई कहानी पर कितना भरोसा जताते हैं.

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