सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLADS के आंकड़े सांसद निधि के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा 2024-29 अवधि में दोनों सदनों के सांसदों से जुड़े आंकड़ों में कुल ₹11,620.9 करोड़ की राशि आवंटित की गई है.
लेकिन इसमें से अब तक केवल ₹3,820.9 करोड़ ही खर्च हो सके हैं. यानी कुल आवंटित राशि का सिर्फ 32.9 प्रतिशत इस्तेमाल हुआ है. सीधे शब्दों में कहें तो सांसद निधि में उपलब्ध हर 100 रुपये में से करीब 33 रुपये ही खर्च हुए हैं, जबकि लगभग 67 रुपये अभी खर्च होने बाकी हैं.
81 हजार से ज्यादा कामों की सिफारिश
MPLADS के तहत सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों की सिफारिश करते हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सांसदों ने अब तक 81,245 विकास कार्यों की सिफारिश की है. इनमें से 42,100 काम पूरे हो चुके हैं, जबकि 39,145 काम अभी पूरे नहीं हुए हैं.
यानी सुझाए गए कुल कार्यों में करीब 51.8 प्रतिशत काम अभी लंबित या प्रगति में हैं. यह आंकड़ा सवाल खड़ा करता है कि जब विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराई जा रही है, तो बड़ी संख्या में परियोजनाएँ समय पर पूरी क्यों नहीं हो पा रही हैं.
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₹1,515 करोड़ से ज्यादा के काम अधूरे
डैशबोर्ड के अनुसार ₹1,515.6 करोड़ ऐसे कार्यों से जुड़े हैं जिन पर भुगतान किया जा चुका है, लेकिन काम अभी पूरा नहीं हुआ है. यही आंकड़ा सबसे ज्यादा चिंता पैदा करता है, क्योंकि यहां मामला केवल प्रस्तावित काम का नहीं, बल्कि उन परियोजनाओं का है जिनमें धनराशि खर्च होने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ.
नागालैंड सबसे आगे
राज्यों के बीच भी फंड उपयोग में बड़ा अंतर दिखाई देता है. डैशबोर्ड के मुताबिक नागालैंड 93.9 प्रतिशत फंड उपयोग के साथ शीर्ष पर है. वहीं राज्यों का औसत उपयोग 55.3 प्रतिशत बताया गया है. इससे यह संकेत मिलता है कि कुछ राज्यों में सांसद निधि का इस्तेमाल तेज़ी से हो रहा है, जबकि कई क्षेत्रों में धन खर्च करने और परियोजनाएँ पूरी करने की गति धीमी है.
अब सांसद वार हिसाब जरूरी
कुल आंकड़ों के बाद अगला सवाल सांसद वार प्रदर्शन का है. आखिर किस सांसद ने कितने काम सुझाए, कितनी राशि खर्च की और कितने काम पूरे कराए?
क्योंकि MPLADS में पैसा आवंटित होना पहला कदम है, लेकिन उसका वास्तविक महत्व तब है जब वह पैसा सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के रूप में जमीन पर दिखाई दे.
मौजूदा आंकड़े यही बताते हैं कि ₹11,620.9 करोड़ के आवंटन के बावजूद सिर्फ ₹3,820.9 करोड़ खर्च हुए हैं और 39,145 विकास कार्य अभी पूरे नहीं हुए हैं.
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है. राशि आवंटित होने के बाद भी काम कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
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