उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही बहुजन समाज पार्टी अंदरूनी कलहों में उलझ गई है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर आकाश आनंद को पार्टी से निकाल दिया है. एक्स पर बहन जी ने इस निलंबन के लिए आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को जिम्मेदार बताया है. हालांकि, मायावती ने कहा था कि अगर आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लेंगे तो आकाश को पार्टी में वापस ले लिया जाएगा लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है. वहीं खबरों के मुताबिक़ आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद अपने भाई के जूते भर सकते हैं. आइए समझते हैं बसपा की महाभारत और इन फैसलों की वजह. और भतीजे आकाश आनंद का राजनीतिक सफ़र.

मायावती क्या बोलीं

मायावती ने अपने आधिकारिक एक्स खाते पर 10 बिंदुओं का ट्वीट करके बताया है कि, अशोक सिद्धार्थ ने जो राजनीतिक संन्यास का फैसला लिया है, वो बहुत देर से उठाया गया क़दम है. मायावती ने इस फैसले में जनता का हवाला देकर यह कहा कि, अगर यह फैसला काफी पहले ही ले लेते तो उनके दामाद आकाश आनंद को भी “विपरीत परिस्थितियों” का सामना नहीं करना पड़ता.

परिवारवादी का आरोप

मायावती अपने भतीजे आकाश को 2019 में पार्टी पर लाई थीं, और तो और आकाश के पिता और मायावती के भाई आनंद कुमार भी पार्टी में लम्बे समय से सक्रिय हैं, हालांकि मायावती ने अब भतीजे और उनके ससुर पर परिवारवाद और निजी स्वार्थ के आरोप लगाते हुए, अंबेडकरवादी राजनीतिक परम्परा की बात कही है, वे बोली, “परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली ज़बरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ट पहचान की है, जिसे मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही मैं भी समर्पित हूँ और जिससे पार्टी के सभी लोगों को ज़रूर सबक़ सीखकर बी.एस.पी. में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहाँ सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी ज़रूरत होती है.

फैसले में देरी

मायावती ने बीते रोज़ भी इस मामले पर ट्वीट किया था, उन्होंने लिखा था कि, “आकाश आनंद के भविष्य को ध्यान में रखकर श्री अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौक़ा है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को त्याग कर व निजी स्वार्थ आदि से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें. तब ऐसी स्थिति में श्री आकाश आनंद का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा और तभी फिर पार्टी उनको उनकी ज़िम्मेदारियाँ वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी, ताकि वे पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें, ऐसी पार्टी में आम राय है.

मायावती के मुताबिक़ इस ट्वीट के आने के बावजूद अशोक सिद्धार्थ ने इस्तीफा देने में देरी की, मायावती लिखती हैं. “अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद श्री आकाश आनंद के उज्जवल भविष्य के साथ ही बी.एस.पी. पार्टी व इसके अंबेडकरवादी बहुजन मूवमेंट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिन्ता होती, तो वे बिना देरी किये कल फ़ौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे श्री आकाश आनंद की पार्टी व मूवमेंट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरक़रार है.”

भतीजे को लेकर क्या बोली

भतीजे आकाश आनंद पर मायावती इस बात पर भी भड़क गई कि बीते रोज़ आए ट्वीट को उन्होंने रिट्वीट क्यों नहीं किया, वह बोलीं, “आकाश आनंद द्वारा भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव क़ायम है कि उन्होंने बी.एस.पी प्रमुख के सोशल मीडिया अकाउंट ’एक्स’ पर तत्संबंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा, हालाँकि यह पोस्ट उनके ही सकारात्मक व भलाई के लिये था.’’ मायावती के अनुसार उनके द्वारा ’एक्स’ पर पोस्ट किए गए ट्वीट को रिपोस्ट करना पार्टी की तरफ़ वफादारी की निशानी है, वे लिखती हैं, “आकाश आनंद बी.एस.पी. प्रमुख के ’एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं. इससे भी यही लगता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ व श्री आकाश आनंद दोनों को पार्टी व मूवमेंट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बी.एस.पी. ने ही इन दोनों को व अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श (ज़मीन) से अर्श (आसमान) की बुलन्दी पर पहुँचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुज़ार हों, वह कम ही होगा, ऐसा सभी लोगों का मानना है.

मायावती बसपा पर क्या बोलीं

अपने आखिरी के तीन बिंदुओं में मायावती कहती हैं कि, “ऐसे हालात में श्री आकाश आनंद को पार्टी व मूवमेंट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि श्री आकाश आनंद डबल माइंड होकर फिर बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेंट का भला कैसे कर सकते हैं?”

“इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये. अतः श्री आकाश आनंद पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐसे में अब इनको पार्टी से पूरी तरह से मुक्त कर दिया गया है”

आकाश आनंद का राजनीतिक सफ़र

बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आकाश आनंद का राजनीतिक सफर साल 2019 में शुरू होता है. मायावती ने उन्हें पहली बार राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी थी. पार्टी में उनका क़द बढ़ता रहा और मार्च 2022 में वह पार्टी के अकेले राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बने रहे. अगली साल 10 दिसंबर 2023 को मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी तक घोषित कर दिया, लेकिन आने वाला साल भतीजे और बुआ के रिश्तों के लिए इतना अच्छा नहीं रहा.

2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मायावती ने आकाश आनंद को अचानक से राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर के पद और उत्तराधिकारी के दर्जे से हटा दिया. करीब डेढ़ महीने बाद 23 जून 2024 को उनकी दोबारा वापसी हुई और उन्हें फिर राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर के साथ उत्तराधिकारी बनाया गया.

पद के उतार-चढ़ाव का दौर 2025 में भी जारी रहा, मायावती ने एक बार फिर आकाश आनंद को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर और उत्तराधिकारी के पद से हटा दिया. हालात इतने बिगड़े कि उन्हें 3 मार्च को BSP से ही निष्कासित कर दिया गया. करीब 40 दिन बाद 13 अप्रैल को माफी के बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई और 18 मई को उन्हें फिर से चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया.

अगस्त 2025 में वह नेशनल कन्वीनर के पद तक पहुंचे, लेकिन 3 सितंबर 2026 को मायावती ने उन्हें फिर बड़ी जिम्मेदारी से हटा दिया और सामान्य कार्यकर्ता की तरह काम करने को कहा. अब 10 सितंबर 2026 को मायावती ने आकाश आनंद को एक बार फिर BSP से बाहर कर दिया है.

मायावती का परिवार

पार्टी का भविष्य समझने मायावती का फैमिली ट्री देखना होगा, क्योंकि बसपा का मतलब है मायावती. बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती के परिवार में उनके भाई आनंद कुमार और भतीजे आकाश आनंद का नाम राजनीति में प्रमुखता से सामने आता रहा है. आनंद कुमार BSP से जुड़े रहे हैं और पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. उनके बेटे आकाश आनंद को मायावती ने धीरे-धीरे पार्टी की राजनीति में आगे बढ़ाया.

अब खेल में एंट्री होती है नए खिलाड़ी की यानी ईशान आनंद की. मायावती के छोटे भतीजे और आनंद कुमार के बेटे ईशान हाल ही में सार्वजनिक मंचों पर मायावती के साथ दिखाई दिए हैं. खबरों के मुताबिक़ छोटे भतीजे को उत्तराधिकारी के लिहाज़ से तैयार किया जा सकता है, साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों में अहम जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है.

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