‘ऐसा लग रहा है मैं उड़ रहा हूं’, मैच जीतने के बाद यह वाक्य थे झंडू कुमार के. वह व्यक्ति जो चल भी नहीं सकता वह अगर उड़ने की बात करे तो सुन के हंसी आ सकती है. पर शायद ऐसी ही शख्सियत के लिए एक कहावत कही गई होगी कि ‘पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है’. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है झंडू कुमार ने, आइए जानते हैं ग्लासगो में भारत को पहला पदक दिलाने वाले इस खिलाड़ी के बारे में.

ई-रिक्शा चलाया, सब्जी बेची 
झंडू कुमार का जीवन बेहद कठिनाइयों में गुजरा है. बिहार के नालंदा जिले से आने वाले झंडू कुमार जब पांच साल के थे, तभी पोलियो के कारण वह शारीरिक रुप से कमजोर हो गए. उनकी कठिनाइयां सिर्फ उन तक ही सीमित नहीं थीं. परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी. उन्होंने घर के खर्च के लिए सब्जियां तक बेची हैं. उनका परिवार हरनौत बाजार में सब्जी बेच कर घर का खर्च चलाता था. 2020 में कोविड के दौर में उनसे वह बिजनेस भी छिन गया. हुआ कुछ यूं की जिस बाजार में वह सब्जी बेचते थे उधर से एक ओवरब्रिज का निर्माण होना था और वह जगह खाली करा दी गई. उसके बाद घर के खर्चे के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया.

जब हीरे की पहचान जौहरी को हुई
28 साल के झंडू कुमार की कहानी शायद आज ऐसी नहीं होती जैसी आज हम अब जानते हैं. इसके पीछे एक ऐसी शख्सियत का हाथ जिसने उनके हुनर को पहचाना और उसको तराशा. साल 2023 में एक राष्ट्रिय पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भारत के पूर्व पैरा पावरलिफ्टर और राष्ट्रिय कोच राजिंदर सिंह राहेलू की नजर उन पर पड़ी. यही वह वक्त जिसने झंडू कुमार की जिंदगी में जादू किया. उन्होंने झंडू कुमार को भारतीय खेल प्राधिकरण यानी SAI( Sports Authority of India) के गांधीनगर स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग का मौका दिया. यही वह मौका था जब उनकी किस्मत ने मेहनत का साथ दिया और उन्होंने खेलो इंडिया गेम्स में रजत पदक जीता. उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रिय मेडल जीते.

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम उठाया और फिर 190 किलोग्राम उठाकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया. हालांकि उन्होंने 196 किलोग्राम का भार भी उठाने की कोशिश की पर सफल नहीं हुए. अगर वह सफल हो जाते तो यह कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड होता. झंडू कुमार की इस सफलता ने सभी भारतीयों को गर्व करने का मौका दिया है. 

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