नई दिल्ली, अगस्त 20: 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी और पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, 80 वर्षीय सज्जन कुमार का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हुआ. वे तिहाड़ जेल में बंद थे और 1984 के दंगों से जुड़े दो मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे.
दो मामलों में मिली थी उम्रकैद
दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. यह मामला पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने से जुड़ा था. इस फैसले के अगले ही दिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.
इसके बाद फरवरी 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें एक अन्य मामले में भी उम्रकैद की सजा सुनाई, जो दो सिख व्यक्तियों, जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़ा था. यह घटना 1 नवंबर 1984 को दिल्ली के साकेत विहार इलाके में हुई थी.
जनवरी 2026 में एक मामले में हुए थे बरी
बीते जनवरी में, दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सज्जन कुमार को जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा से जुड़े एक अलग मामले में बरी कर दिया था. विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने यह आदेश सुनाया था. बता दें कि इस मामले में अगस्त 2023 में उन पर दंगा भड़काने और वैमनस्य फैलाने के आरोप तय किए गए थे, जबकि हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया गया था. यह बरी होना दो अन्य मामलों में उनकी उम्रकैद की सजा को प्रभावित नहीं करता था, वे तब भी दोषी करार दिए जा चुके व्यक्ति के रूप में जेल में ही थे.
राजनीतिक सफर
तीन बार लोकसभा सांसद रहे सज्जन कुमार ने बाहरी दिल्ली सीट का प्रतिनिधित्व किया था. 1977 में दिल्ली नगर निगम पार्षद के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले सज्जन कुमार दिल्ली की राजनीति में एक प्रभावशाली जाट नेता माने जाते थे. 1984 के दंगों में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हजारों सिखों की जान गई थी, और सज्जन कुमार पर आरोप था कि उन्होंने भीड़ को उकसाया.
-ममता सिंह
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