भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है. यह बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही. युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. आखिर इसकी वजह क्या है? क्या हमारी रोज की डाइट में शामिल चीनी इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है? और डायबिटीज से बचने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव जरूरी हैं?

भारत में डायबिटीज एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है. ICMR-INDIAB अध्ययन के अनुसार, देश में करोड़ों लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं. बड़ी संख्या में लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में भी हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि डायबिटीज के मुख्य कारण क्या है.

डायबिटीज को लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

डायबिटीज से जुड़े इन तमाम सवालों को समझने के लिए हमने डॉ. प्रशांत से खास बातचीत की.उनके मुताबिक, डायबिटीज का खतरा कई कारणों से होता है. जैसे तनाव, बढ़ता वजन और जेनेटिक फैक्टर हैं.

डायबिटीज को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी

डायबिटीज का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के दिमाग में मोटापे की तस्वीर आती है. लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. दुबले या सामान्य वजन वाले लोगों को भी डायबिटीज हो सकती है. इसके पीछे जेनेटिक कारण, इंसुलिन की कार्यप्रणाली और लाइफस्टाइल जैसे कई फैक्टर हो सकते हैं. यानी सिर्फ शरीर देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को डायबिटीज का खतरा है या नहीं.

युवाओं में क्यों बढ़ रही है डायबिटीज?

डायबिटीज अब उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रही है. युवाओं में भी इसके मामले देखने को मिल रहे हैं. बदलती लाइफस्टाइल इसका एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है.

आज हमारी फिजिकल एक्टिविटी पहले की तुलना में कम हो गई है. मोबाइल और कंप्यूटर पर ज्यादा समय बीतता है. लंबे समय तक बैठे रहना आम हो गया है. इसके अलावा फास्ट फूड, मीठे पेय और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाला खाना भी समस्या बढ़ा सकता है. यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हम कितना मीठा खाते हैं. सवाल यह भी है कि हम कितना चलते हैं, क्या खाते हैं और पूरा दिन किस तरह बिताते हैं.

शरीर में आखिर होता क्या है?

हमारे शरीर में इंसुलिन नाम का हार्मोन होता है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कुछ लोगों में समय के साथ शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं. इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है. ऐसी स्थिति में ब्लड शुगर बढ़ सकता है. कम शारीरिक गतिविधि, ज्यादा कैलोरी वाला भोजन, बढ़ता वजन और आनुवंशिक कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं.

डायबिटीज के लक्षण क्या हैं?

डायबिटीज कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है. इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है. फिर भी कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है. बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, कमजोरी या थकान महसूस होना और धुंधला दिखाई देना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं. कुछ लोगों में घाव भरने में अधिक समय लग सकता है या हाथ-पैर में झुनझुनी जैसी समस्या हो सकती है. अगर ऐसे लक्षण लगातार दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.

डायबिटीज की जांच कैसे होती है?

डायबिटीज की जांच के लिए कई तरह के ब्लड टेस्ट किए जाते हैं. इनमें फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसे टेस्ट शामिल हैं. HbA1c टेस्ट से पिछले कुछ महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है. समय पर जांच होने से स्थिति की पहचान जल्दी हो सकती है. इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव किए जा सकते हैं.

लंबे समय तक शुगर बढ़ी रहे तो क्या खतरा है?

डायबिटीज को लंबे समय तक कंट्रोल में न रखा जाए, तो शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं. इसका असर आंखों, किडनी, नसों और हृदय पर पड़ सकता है. यही वजह है कि डायबिटीज की समय पर पहचान और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसका प्रबंधन बेहद जरूरी है.

क्या तनाव भी बढ़ा सकता है ब्लड शुगर?

डायबिटीज की चर्चा में एक और फैक्टर अक्सर नजरअंदाज हो जाता है तनाव. लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है. इसका असर ब्लड ग्लूकोज पर भी पड़ सकता है. इसलिए डायबिटीज के जोखिम को कम करने या इसे मैनेज करने में सिर्फ डाइट ही नहीं, बल्कि तनाव को संभालना भी महत्वपूर्ण है.

परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, पर्याप्त नींद लेना, योग या प्राणायाम जैसी गतिविधियां तनाव को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं.

डायबिटीज से बचने के लिए क्या करें?

सबसे जरूरी है अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना. इसके लिए हर दिन जिम जाना जरूरी नहीं है.अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना, साइकिल चलाना, जॉगिंग या दूसरी शारीरिक गतिविधियां की जा सकती हैं. जो लोग ज्यादा देर तक खड़े या चल नहीं सकते, वे डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से अपनी क्षमता के अनुसार एक्सरसाइज चुन सकते हैं.

खाने में किन चीजों का रखें ध्यान?

डाइट में संतुलन बेहद जरूरी है. बहुत ज्यादा मीठे पेय, फास्ट फूड और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाले खाने को सीमित करना बेहतर है. वहीं सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और संतुलित भोजन डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं. यह समझना भी जरूरी है कि सिर्फ चीनी छोड़ देने से डायबिटीज का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता. पूरी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है.

टेक्नोलॉजी भी हो सकती है मददगार

आज टेक्नोलॉजी की मदद से अपनी रोजमर्रा की एक्टिविटी पर नजर रखना आसान हो गया है. मोबाइल ऐप्स और स्मार्ट डिवाइस की मदद से स्टेप्स और फिजिकल एक्टिविटी को ट्रैक किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार घर पर ग्लूकोमीटर से ब्लड शुगर की निगरानी भी की जा सकती है. हालांकि, घर पर की गई रीडिंग को समझने या दवा में बदलाव करने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

सिर्फ चीनी को दोष देना सही नहीं

डायबिटीज की पूरी कहानी सिर्फ चीनी की नहीं है. हम कितना मीठा खाते हैं, क्या खाते हैं, कितना चलते हैं, कितना तनाव लेते हैं और हमारी पूरी लाइफस्टाइल कैसी है. इन सभी चीजों का महत्व है. इसलिए अपनी लाइफस्टाइल को हेल्दी बनाएं. डायबिटीज के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच कराएं.

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